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तीन अथॉरिटी के सीईओ रमारमण के काम करने पर रोक

Sat, 02 Jul 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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बीते छह वर्षों से नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के मुख्य अधिशासी के पद पर जमे आईएएस अधिकारी रमारमण के काम करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। फैसला सुनाते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि सूबे में कई योग्य अधिकारी हैं, फिर रमारमण को ही तीनों प्राधिकरणों का सीईओ क्यों बनाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में रमारमण को पद से स्थानंातरित करने का मामला मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाले बोर्ड को सुपुर्द कर दिया है। निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव इस बारे में लिए गए निर्णय से अदालत को 20 जुलाई को अवगत कराएं।
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अखिल भारतीय मानव कल्याण सेवा संस्थान और जितेंद्र कुमार गोयल की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही जस्टिस अरुण टंडन और जस्टिस सुनीता अग्रवाल की बेंच ने प्रदेश सरकार की उस आपत्ति को खारिज कर दिया कि याचिका पोषणीय नहीं है और हाईकोर्ट में अवकाश चल रहा है। इस मामले में ऐसी कोई जल्दी नहीं है कि अवकाश के दौरान सुनवाई की जाए। पीठ ने कहा कि वह इस प्रकरण पर स्वत: संज्ञान ले रहे हैं। 
शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित समाचार का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि यादव सिंह और रामेंद्र सिंह जैसे कई अधिकारियों पर भूमि आवंटन में घोटाले के गंभीर आरोप हैं। इसके बावजूद एक ही अधिकारी को इन पदों पर छह वर्षों से बनाए रखने के पीछे क्या उद्देश्य है। सरकार को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में पक्षपात पूर्ण कार्य नहीं करना चाहिए। स्थानांतरण को लेकर पारदर्शिता होनी चाहिए। अदालत ने कई माह पहले आदेश दिया था कि महत्वपूर्ण पदों पर लंबे समय से जमे अधिकारियों का स्थानंातरण किया जाए, इसके बावजूद सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।
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मुख्य स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की। उन्होंने कहा कि याचिका पर महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह पक्ष रखेंगे। सरकार का पक्ष सुनने के बाद ही आदेश दिया जाए, मगर कोर्ट ने प्रदेश सरकार की आपत्ति को दरकिनार करते हुए रमारमण के काम करने पर रोक लगा दी है। याचिका पर अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

छह वर्षों से तीन प्राधिकरणों के सीईओ के पद पर जमे रमारमण की तैनाती पर अदालत काफी सख्त नजर आई। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रमारमण के कार्यकाल में यादव सिंह जैसे कई बड़े-बड़े भूमि घोटाले सामने आए तो फिर विभाग का मुखिया होने के नाते उनकी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई। याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता अमर सिंह ने कहा कि इन प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यहां के कई चतुर्थश्रेणी कर्मचारी लग्जरी गाड़ियों से चल रहे हैं और करोड़ों के बंगले में रहते हैं। एक चतुर्थश्रेणी कर्मचारी तो बिल्डर बन गया है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि आईएएस अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए एक कमेटी बनी है, वही ट्रांसफर और पोस्टिंग पर निर्णय लेती है। कोर्ट ने कमेटी को दो सप्ताह में रमारमण के स्थानांतरण पर निर्णय लेकर अवगत कराने को कहा है।

रमारमण को तीन प्राधिकरणों का चेयरमैन बनाए जाने और पद पर लंबे समय से जमे होने पर हाईकोर्ट ने तीन माह पहले ही नाराजगी जता दी थी तथा प्रदेश सरकार से इसका जवाब भी तलब कर लिया था। जितेंद्र कुमार गोयल की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो सिंतबर 2015 को पूछा था कि रमारमण में ऐसी क्या खूबी है कि उनको तीनों अथॉरिटी का जिम्मा दे दिया गया है और लंबे समय से हटाया नहीं गया।

कोर्ट ने कहा कि इन प्राधिकरणों में कई ऐसे अधिकारी हैं जो वर्षों से इस तरह से जमे हैं जैसे उनका पद स्थानांतरणीय ही नहीं है। जबकि प्राधिकरण के पद स्थानांतरण वाले पद होते हैं। रमारमण को अथॉरिटी में पांच जुलाई 2010 को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया था। तब से वह इस पद हटाए नहीं गए। शुक्रवार को प्रकरण दोबारा सामने पर कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सरकार ने उनके आदेश के दस माह बाद भी इस मामले में कुछ नहीं किया है। 
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