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छात्रसंघ उपाध्यक्ष की डिग्री वापस लेने की नोटिस की शिकायत राष्ट्रपति से

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AUSU Akhilesh Yadav - फोटो : AU
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में लोकतंत्र बहाली के लिए छात्रसंघ उपाध्यक्ष ने देश के राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। इविवि के शहीद लाल पद्मधर की मूर्ति के सामने स्थित शोमनाथ सिंह पार्क में हुई बैठक में इविवि के छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव की डिग्री वापस लेने की नोटिस की कड़ी निंदा की गई। बैठक में तय किया गया कि इसकी प्रतिलिपि प्रधानमंत्री एवं मानव संसाधन विकास मंत्री के साथ यूजीसी को भेजा जाएगा। ज्ञापन में विवि प्रशासन पर पूरी तरह से संवादहीनता है, विवि का कोई भी छात्र अथवा प्रतिनिधि विवि के किसी भी अधिकारी से मिल नहीं सकता, वार्ता के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया गया है। छात्रों की समस्या उठाने को अनुशासनहीनता कहते हैं घटना प्रदर्शन को अराजकता कहते हैं। फेसबुक पर अपनी राय व्यक्त करने को अपराध कहते हैं तथा छात्र समूह को अराजक तत्व कहते हैं।
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अखिलेश यादव ने कहा कि जब मैंने शासन बहाली के लिए आवाज उठाई तो मुझे 27 जून को निलंबित कर दिया गया। अपनी बातों को फेसबुक के माध्यम से छात्रों को साझा करना चाहा और छात्र कल्याण परिषद को पत्र लिखकर छात्रों की समस्या से अवगत कराना चाहा तो मुझे 10 जुलाई को काली सूची में डाल दिया गया। विवि की ओर से मेरा प्रवेश समस्त पाठ्यक्त्रस्मों में प्रतिबंधित कर दिया गया। विश्वविद्यालय की हॉकी टीम का कप्तान होने के नाते जब मैंने डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार से स्पोर्ट्स कोटे के तहत चयनित छात्रों की जानकारी मांगी तो मेरा 24 जुलाई को विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश ही प्रतिबंधित कर दिया। इन बातों को लेकर कुलपति से मिलने विवि परिसर गया तो चीफ प्रॉक्टर प्रो. राम सेवक दुबे ने बल पूर्वक रोका और डिग्री रद्द करने की धमकी दी। विवि के कुलपति को लेकर जब मैने अपनी बात रखनी चाही तो 30 जुलाई को स्नातक उपाधि वापस लेने की नोटिस दे दी गई। राष्टपति को पत्र भेजकर छात्रसंघ उपाध्यक्ष ने विवि में कानून एवं संविधान का शासन बहाल करने की मांग की है।
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