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चहके चेहरे, खुश हुईं माएं, चलकर आ गईं सुविधाएं

Mon, 23 Mar 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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यह उनके लिए सिर्फ सुविधाओं का टोकन नहीं था, नई और बेहतर जिंदगी की उम्मीदों का सर्टिफिकेट भी था। अलग-अलग विभागों की सुविधाओं वाला ‘पास’ पाकर मीलों दूर की सफर और लंबे इंतजार की थकान काफूर थी। उनके चेहरे की चमक बयां कर रही थी कि  वे अब अपनी तकदीर खुद लिखने के लिए तैयार हैं। एंग्लो बंगाली इंटर कालेज में रविवार को आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के निशक्तता शिविर में उम्मीदों और उत्साह का यह आलम दिन निकलने के साथ शुरू हुआ तो देर शाम तक बरकरार रहा। रेलवे पास, पेंशन आदि सुविधाओं का सर्टिफिकेट तथा जीवन के लिए उपयोगी उपकरण का टोकन पाकर नि:शक्तजनों की जुबां पर अमर उजाला और इस महाअभियान से जुड़े सभी लोगों के लिए खूब दुआएं थीं।
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शिविर में शामिल होने के लिए नि:शक्तजनों और उनके परिजनों का सुबह से ही जमावड़ा शुरू हो गया था। कंट्रोल रूम ही नहीं अलग-अलग विभागों की ओर से लगाए काउंटर के सामने भी लंबी कतार थी जो शाम तक लगी रही। इसमें शंकरगढ़, बारा, कोरांव, हंडिया, हनुमानगंज, नवाबगंज समेत जिले के हर कोने से लोग पहुंचे थे। शिविर से बंधी उम्मीदों का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि एंग्लो बंगाली इंटर कालेज के बड़े मैदान में भी हर तरफ लोग ही लोग थे। अमर उजाला के शिविर में उनकी तमाम उम्मीदें पूरी भी हुई। बच्चों को लेकर आईं तमाम माएं साधन और सुविधाओं से निहाल हुईं।

उत्तर मध्य रेलवे और स्वास्थ्य विभाग के काउंटर से हजारों नि:शक्तजनों ने रेलवे का पास प्राप्त किया। भीड़ की वजह से उनके परिजनों को लाइन में तो जरूर लगना पड़ा लेकिन एक ही जगह सारी औपचारिकताएं पूरी होने से वे काफी खुश थे। परिसर में क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, विकलांग व्यावसायिक पुनर्वास केंद्र पॉवर कारपोरेशन, नगर निगम आदि विभागों के भी काउंटर लगे थे, जहां लाभार्थियों की रोजगार, आवास, पेंशन आदि से जुड़ी समस्याओं का भी निदान किया गया।
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इनकी खुशी उस वक्त और बढ़ गई जब उन्हें उपकरण, कृत्रिम अंग और मुफ्त ऑपरेशन की मदद से नि:शक्तता से हमेशा से छुटकारे की गारंटी वाला टोकन मिला। एलिम्को और नारायण सेवा संस्थान के कैंप से इसका टोकन पाने वालों की आंखे खुशी भी छलक गईं। पूछते ही दोनों पैर से विकलांग हथिगन करछना के चांद बाबा बोल उठे, ‘भइया आप लोगन के भगवान खूब तरक्की करैं।’ दोनों ही पैर से विकलांग कोटवां हनुमानगंज के शिव प्रसाद का कहना था, ‘भइया पता ही नाहीं रहे कि सरकार हमलोगन के खातिन एतना योजना चलावत हय। एनकर लाभ अब हमहूं का मिली।’ सैदाबाद के शैलेश का कहना था कि बहुत आसानी से उनका सर्टिफिकेट बना। कहीं कोई परेशानी नहीं हुई।

नि:शक्तता शिविर में लोगों की मदद के लिए वालंटियर्स तो अपनी-अपनी जगह पूरी मुस्तैदी से जमे ही रहे, नि:शक्तजनों और उनके परिजनों ने भी एक-दूसरे की मदद की। वे एक-दूसरे के लिए खुद रास्ता छोड़ दे रहे थे तो जरूरत पड़ने पर एक से दूसरे स्थान तक उन्हें पहुंचने में भी मदद करते। इसका परिणाम यह रहा कि इतनी भीड़ के बावजूद अव्यवस्था तो दूर, लोगों को किसी तरह की परेशानी तक नहीं हुई।
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