पाकिस्तान के पेशावर में एक शिक्षण संस्थान में घुसे आतंकियों ने कई शिक्षकों और छात्रों को मौत के घाट उतार दिया। आतंकियों की इस क्रूरता ने शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़ा कर दिया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था इस तरह की आतंकी हमला तो दूर अराजक तत्वों को रोकने में भी नाकाम है। आतंकी या बदमाश परिसर में कहीं से भी घुसकर मकसद को अंजाम दे सकते हैं।
यूजीसी ने छात्र-छात्राआें की सुरक्षा के लिए विभिन्न सेल के गठन के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा परिसर पर सीसीटीवी कैमरे से नजर रखने के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए भी कहा है। इसके अंतर्गत जेएनयू, बीएचयू आदि संस्थानों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। ज्यादातर संस्थानों में प्रवेश के लिए सिर्फ एक रास्ता है। परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश पूर्णत: प्रतिबंधित है। कई विश्वविद्यालयों में खुद की सेना है। इसके विपरीत इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर की बाउंड्री भी सुरक्षा प्रदान नहीं करती।
एक बच्चा भी उसे लांघ सकता है। सबसे सुरक्षित सीनेट परिसर की ही बात करें तो उसमें तीन गेट से प्रवेश दिया जाता है। इन पर गार्ड तैनात हैं, लेकिन वे अराजकता पर उतारू छात्रों को रोकने में भी सक्षम नहीं हैं। परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगाने की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के 10 वर्ष बाद भी कैमरे नहीं लगे। यही वजह है कि परिसर अराजकता का पर्याय बन गया है। ऐसे में परिसर में आतंकी हमले पर रोक की सोच भी बेमानी है।
विश्वविद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए रक्षा अध्ययन विभाग के प्रोफेसर आरके उपाध्याय के नेतृत्व में विस्तृत योजना बनाई गई है। शिक्षकों का दावा है कि इस पर अमल हो तो परिसर पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा। इसके अंतर्गत सभी परिसर की बाउंड्री ऊंची की जानी है। परिसर में एकल प्रवेश के प्रावधान की बात है। विश्वविद्यालय में खुद फौज रखने की बात कही गई है। परिसर में खुली बैंक की शाखा, डाकघर आदि का प्रवेश बाहर से करने समेत कई अन्य इंतजाम उठाए जाने के सुझाव दिए गए हैं। इसके अलावा सभी परिसरों को जोड़ने, इसके लिए आसपास की सड़कों को बंद करने समेत कई अन्य सुझाव भी शामिल हैं लेकिन पांच वर्षों से यह प्रस्ताव फाइल में बंद है। परिसर में अराजकता की बड़ी घटना तथा शिक्षकों पर हमला के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा जरूर शुरू होती है लेकिन उससे आगे कुछ नहीं होता।