फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गजब : राजू पाल की हत्या में वांछित था अतीक का शूटर कवि, फिर भी उसके नाम जारी हो गया रायफल का लाइसेंस

Sat, 08 Apr 2023 10:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, कौशांबी

सार

अब बड़ा सवाल यह है कि जिस कवि को सीबीआई और पुलिस 18 साल से भगोड़ा घोषित कर तलाश रही थी, वह थाने व कलक्ट्रेट पहुंचकर अपने शस्त्र का नवीनीकरण भी कराता रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
Kaushambi : अब्दुल कवि। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड में 18 साल से फरार चल रहे माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि के सरेंडर के बाद तमाम सनसनीखेज खुलासे सामने आ रहे हैं। हत्याकांड में आरोपी अब्दुल कवि के नाम वर्ष 2006 में न सिर्फ रायफल का लाइसेंस स्वीकृत हुआ, बल्कि 24 अगस्त 2009 को लाइसेंस का नवीनीकरण भी कर दिया गया। इतना ही नहीं वर्ष 2015 में शूटर ने कलक्ट्रेट स्थित शस्त्र अनुभाग में यूनिक आईडी भी अपने लाइसेंस कॉपी पर दर्ज कराई।

विज्ञापन


अब बड़ा सवाल यह है कि जिस कवि को सीबीआई और पुलिस 18 साल से भगोड़ा घोषित कर तलाश रही थी, वह थाने व कलक्ट्रेट पहुंचकर अपने शस्त्र का नवीनीकरण भी कराता रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। 25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या में आरोपी इस शूटर का सरकारी मशीनरी में भी खासा प्रभाव रहा। कवि ने पुलिस-प्रशासन के अफसरों को इस्तेमाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक राजू पाल की हत्या के बाद इसकी विवेचना धूमनगंज कोतवाली के दरोगा परशुराम सिंह को मिली। उन्होंने अपनी पूरक चार्जशीट में अब्दुल कवि का नाम नहीं खोला। जबकि, घटना में कवि को नामजद किया गया था। विवेचक ने अपनी पूरक चार्जशीट में लिखा कि अब्दुल कवि नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है। इसके बाद विवेचना सुरेंद्र सिंह को मिली और उन्होंने शूटर कवि का नाम प्रकाश में लाया।

विज्ञापन

तीसरे विवेचक एनएस परिहार ने भी अब्दुल कवि को आरोपी करार दिया। इस दौरान हैरान करने वाली बात यह रही कि सरायअकिल कोतवाली के भखंदा निवासी अब्दुल कवि ने वर्ष 2006 में अपने गांव के पते से रायफल के लाइसेंस के लिए आवेदन कर दिया। तत्कालीन थाना प्रभारी तरुण पांडेय बिना किसी जांच-पड़ताल के कवि के शस्त्र आवेदन पर अपनी स्वीकृति दे दी।

28 अगस्त 2006 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने अब्दुल कवि के शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को स्वीकृति प्रदान की। अब्दुल कवि का लाइसेंस सरायअकिल कोतवाली के शस्त्र रजिस्टर में 10,508 के नाम पर पंजीकृत है। अंतिम दफा अब्दुल कवि ने 28 नवंबर 2009 को अपने शस्त्र का नवीनीकरण कराया। वर्ष 2014-15 में तत्कालीन शस्त्र लिपिक रहे सुभाष जायसवाल ने लाइसेंस की यूनिक आईडी 6120054412015 जारी की।

कवि की तलाश का ढिंढोरा पीटती रही पुलिस
राजू पाल हत्याकांड की जांच जब से सीबीआई के हवाले हुई तब से कवि फरार था। कवि की गिरफ्तारी नहीं होने पर 14 फरवरी को उसके घर पर सीबीआई ने कुर्की का नोटिस चस्पा किया। इन सब कवायदों के बीच वह थाने, कलक्ट्रेट आता-जाता रहा। अब अगर बिना उसके आए उसकी रायफल के लाइसेंस का नवीनीकरण हुआ तो यह और भी गंभीर मामला है। पुलिस कवि को गिरफ्तार नहीं कर सकी और उसकी तलाश का ढिंढोरा पीटती रह गई।

घरवालों ने कोरोना काल में कवि की मौत की फैलाई थी अफवाह

एसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद जब पुलिस ने उसके परिवार वालों पर शिकंजा कसना शुरू किया तो घरवालों ने बताया कि कोरोना काल के दौरान कवि की मौत हो चुकी है, लेकिन इसका कोई साक्ष्य परिवार के लोग नहीं दे सके। इसे लेकर पुलिस को शक हुआ तो उसने गहनता से छानबीन की। तब यह तथ्य सामने आया कि कवि के नाम पर रायफल का लाइसेंस भी जारी है।
विज्ञापन

ऑनलाइन रिकाॅर्ड से गायब हो गया कवि का लाइसेंस
प्रदेश सरकार ने शस्त्र लाइसेंस के बाबत वर्ष 2014-15 में यूनिक आईडी की व्यवस्था की थी। वर्ष 2009 तक तो कवि की लाइसेंसी रायफल का डेटा ऑनलाइन व ऑफलाइन मिल रहा है, लेकिन उसके बाद पोर्टल पर शस्त्र के बाबत जानकारी नहीं है। इस बीच फरार शूटर ने पांच अप्रैल को पुलिस की सारी चौकसी को धता बताते हुए लखनऊ की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

शूटर कवि की तलाश में जब पुलिस ने उसके परिवार व रिश्तेदारों पर शिकंजा कसा, तभी पता चल गया था कि उसने रायफल का लाइसेंस ले रखा है। घर की तलाशी के दौरान रायफल नहीं मिली। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी। - बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें