पांच बार के विधायक और यूपी की हॉट सीट फूलपुर से सपा के टिकट पर सांसद रहे माफिया अतीक का सियासी रथ उसकी मौत के साथ ही अनिश्चितता के भंवर में डूब रहा है। तीन दशक के अपने सियासी सफर में आखिरी बार उसने वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ साबरमती जेल से चुनाव लड़ा था।
एक दौर था जब कई दलों ने उसकी जुर्म की काली किताब के पन्नों पर सियासत का कवर खूब चढ़ाया, लेकिन अब उसके राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाने वाला भी कुनबे में कोई नजर नहीं आ रहा है। 50 हजार की इनामी बीवी शाइस्ता परवीन फरार है तो दो बेटे उमर और अली जेल की सलाखों के पीछे हैं। बालगृह से छूटने के बाद बाकी दो बेटे अहजम और आबान रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
चकिया में 1962 में एक तांगे वाले के परिवार में सबसे बड़े बेटे के रूप में पैदा हुए अतीक के जुर्म की दुनिया में से लेकर सियासी गलीचे पर कदम रखने तक की कहानी कम दिलचस्प नहीं है। 10वीं में फेल होने के बाद ही अतीक ने पढ़ाई छोड़ अवैध वाहन स्टैंडों से वसूली और गुंडागर्दी शुरू कर दी। पैसे और पावर का चस्का ऐसा लगा कि 1989 में उसने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा और शहर के माफिया चांद बाबा को हराकर विधायक बन गया।
कई बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बना विधायक
इसके बाद 1991 और फिर 1993 में भी इसी सीट से वह निर्दल ही विधायक चुना जाता रहा। कद और ताकत बढ़ने के साथ ही वह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के करीब आ गया। 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर शहर पश्चिम से ही चौथी बार विधायक चुना गया। फिर सपा से उसकी दूरी बन गई। 1999 में उसे अपना दल का साथ मिल गया। उस समय उसने अद के टिकट पर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार शिकस्त मिली।
फिर 2002 में अपना दल के ही टिकट पर वह एक बार फिर इलाहाबाद पश्चिम सीट से चुनाव मैदान में उतरा और जीत कर विधानसभा पहुंच गया। इस दौरान 2004 में सपा ने उसे हॉट सीट फूलपुर से लोकसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बना दिया। तब अतीक ने फूलपुर से जीत दर्ज कर संसद का सफर तय किया। 2014 में अतीक अहमद ने श्रावस्ती से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं हुई। आखिरी चुनाव उसने 2019 में साबरमती जेल में रहते हुए पीएम मोदी के खिलाफ वाराणसी से लड़ा था।
मायावती के राज में शुरू हुए बुरे दिन
मायावती के राज में 2007 में अतीक अहमद के बुरे दिन शुरू हुए। तब बसपा सरकार ने उसे राज्य का मोस्ट वांटेड अपराधी घोषित किया था। उस पर इनाम भी घोषित किया था। आखिरकार दिल्ली से उसे गिरफ्तार किया गया और फिर यूपी की अलग अलग जेलों में वह बंद रहा।
भाई की हार का बदला लेने के लिए राजू पाल को गोलियों से करवा दिया था छलनी
2004 में जब अतीक ने फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा तब उसकी शहर पश्चिम की परंपरागत सीट खाली हो गई थी। अतीक ने अपने भाई अशरफ को यहां से चुनाव लड़वाया, लेकिन वह हार गया। तब बीएसपी नेता राजू पाल ने अशरफ को हरा दिया। यह बात अतीक को रास नहीं आई। राजू पाल को चुनाव जीते चंद दिन ही बीते थे कि उसकी हत्या करवा दी गई। राजू पाल के काफिले का पीछा करते हुए अतीक अहमद गैंग ने गोलियां बरसाई थीं। 10 दिन पहले ही राजू पाल की शादी पूजा पाल के साथ हुई थी। बसपा से पहली बार विधायक चुनी गईं पूजा पाल अब सपा के टिकट पर चायल से विधायक हैं।
उमेश पाल हत्याकांड में कसा अतीक गैंग पर शिकंजा
सूबे में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद एक व्यापारी के अपहरण और जेल में बुलाकर उसकी पिटाई का वीडियो वायरल होने के मामले में अतीक अहमद का नाम सामने आया। तब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उसे यूपी की देवरिया जेल से बाहर गुजरात की साबरमती जेल भेजा गया था। बीते वर्ष 24 फरवरी 2023 को राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली-बम से उड़ाकर हत्या किए जाने के बाद उस पर योगी सरकार का शिकंजा पूरी तरह कस गया।