माफिया अतीक अहमद के शूटर अब्दुल कवि और करीबी कौड़िहार ब्लॉक प्रमुख गोतस्कर गिरोह सरगना मुजफ्फर की जेल बदली जाएगी। सुरक्षा कारणों से दोनों को प्रदेश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली जेल में ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही उन्हें स्थानांतरित भी किया जा सकता है। हालांकि नैनी व कौशाम्बी जेल प्रशासन अभी ऐसा कोई आदेश न मिलने की बात कह रहे हैं।
अब्दुल कवि जिला कारागार कौशाम्बी जबकि मुजफ्फर जिला कारागार नैनी में निरुद्ध है। अब्दुल कवि कौशाम्बी के सरायअकिल के भखंदा उपरहार का रहने वाला है। उसे राजूपाल हत्याकांड में 10 साल की सजा हो चुकी है। इस वारदात के बाद करीब 18 साल तक फरार रहने के बाद पिछले साल पांच अप्रैल को उसने लखनऊ सीबीआई कोर्ट मे सरेंडर कर दिया था। वर्तमान में वह आर्म्स एक्ट के मामले में कौशाम्बी जेल में है।
उधर प्रयागराज के नवाबगंज स्थित चफरी का मूल निवासी मुजफ्फर पूरामुफ्ती थाने का हिस्ट्रीशीटर है। वह अंतर जनपदीय गोतस्कर गिरोह का सरगना है। उस पर प्रयागराज के अलावा वाराणसी, कौशाम्बी, फतेहपुर, भदोही व चंदौली में 30 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर मामले गोवध अधिनियम के हैं।
उसने जेल में रहते हुए ही ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीता था। इसी साल अक्तूबर में उस पर सोरांव पुलिस ने गैंगस्टर लगाया था। इससे पहले भी पांच बार उस पर गैंगस्टर लग चुका है।
सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा कारणाें से कारागार विभाग के अफसरों ने दोनों की जेल बदलने की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र भेजा था। इस पर विचार करने के बाद शासन की ओर से मंजूरी दे दी गई है। दोनों को फतेहगढ़ जेल भेजा जा सकता है। हालांकि, कौशाम्बी व नैनी जिला कारागार के अधीक्षकों अमिता दुबे व अजितेश मिश्रा ने इस संबंध में कोई भी आदेश मिलने की बात से इन्कार किया।