मीडियाकर्मियों ने बताया कि अतीक-अशरफ के कस्टडी रिमांड पर आने के बाद देश और प्रदेश से तमाम मीडियाकर्मी प्रयागराज आकर घटना कवर कर रहे थे। तमाम लोगों को वे नहीं जानते थे। इसी तरह से घटना वाले दिन हत्यारे भी वहां खड़े हो गए। वे किसी से बात नहीं कर रहे थे। अतीक से पूछा गया था कि असद को सुपुर्दे खाक किया गया था। इसमें वह क्यों नहीं गए। दो-तीन बार पूछने पर अतीक ने कहा था कि नहीं ले गए तो नहीं गए।
इसी के बाद अशरफ ने यह कहा कि मेन बात यह है कि गुड्डू मुस्लिम। इसी के बाद कातिलों ने अतीक के सिर में सटाकर गोली मार दी। इसके बाद वहां अस्पताल परिसर गोलियों से गूंज उठा। मीडियाकर्मी जान बचाकर भागने लगे। दर्जनों राउंड फायर के बाद धार्मिक नारे लगाते हुए तीनों ने सरेंडर कर दिया। आयोग ने मीडियाकर्मियों से अलग अलग भी हत्या से पहले पहले और बाद के घटनाक्रम को बताने को कहा।
शपथपत्र भी दिया आयोग को
मीडियाकर्मियों ने घटना को लेकर जो भी बयान दिया था, उसका शपथपत्र भी आयोग को दिया गया। आयोग के सदस्यों ने शपथपत्र के सभी पैराग्राफ को पढ़कर कुछ बिंदुओं पर मीडियाकर्मियों से सवाल पूछे।
एसआईटी ने शपथपत्र के आधार पर दर्ज किए बयान
अतीक और अशरफ हत्या की जांच कर रही एसआईटी ने मीडियाकर्मियों के शपथपत्र के आधार पर बयान दर्ज किया। मीडियाकर्मियों के साथ साथ मेडिकल स्टाफ और सुरक्षा में लगे पुलिस वालों को भी चश्मदीद गवाह बनाया गया है।