सूर्य, कुंभ राशि में है। अपने मार्ग पर गति करता हुआ 13 मार्च को मीन राशि में प्रवेश करेगा। इससे पूर्व चंद्रमा के निकट बृहस्पति पहुंच चुका है। यह अधिकांश एक सीध में है। आसमान साफ होने पर इसे बिना टेलीस्कोप के भी देखा जा सकता है। सबसे छोटा ग्रह बुध व सबसे चमकीला ग्रह शुक्र मीन राशि में है। माह के शुरुआत में सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में देखा जा सकता है। लाल ग्रह मंगल, मिथुन राशि में है, मध्यरात्रि 2:30 बजे अस्त हो रहा है। सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति वृष राशि में है, रात्रि 12: 00 बजे अस्त हो रहा है।
इसी क्रम में वलयाकार शनि ग्रह कुंभ राशि में है। अपने अस्त होने से पूर्व यह देखा जा सकते है। अलग-अलग क्षेत्रों में देखने पर अलग-अलग स्थितियां नजर आएंगी। महीने के अंतिम दिनों में सूर्योदय से पहले पूर्व में दिखाई देगा। तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा ने बताया कि एक मार्च को चंद्रमा, शुक्र और बुध ग्रह के निकट था। छह मार्च को बृहस्पति ग्रह चंद्रमा के निकट रहेगा। नौ मार्च को मंगल के अधिक निकट होगा। 14 मार्च को पूर्णिमा, 20 मार्च को वसंत विषुव यानी दिन व रात बराबर रहेगा। 28 मार्च को अमावस्या होगी।
उन्होंने बताया कि उत्तर दिशा में हम ‘ध्रुव’ तारे को पश्चिम में शर्मिष्ठा तारामंडल या उत्तर-पूर्व में सप्तर्षि के सूचक से पहचान सकते हैं। राशि चक्र सूर्य के काल्पनिक पथ पर स्थित है, जिसे आयनिकवृत्त के नाम से जानते हैं। आकाश में मीन, मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क और सिंह राशि को देख सकते हैं। साथ ही आकाश में कृत्तिका, रोहणी, बह्महृदय, पुनर्वसु, मघा, चित्रा, काक्षी, राजन्य, व्याध, प्रश्वा, अगस्त्य और स्वाति चमकीले तारें देख सकते हैं। आकाश में दिखाई देने वाली धुंधली पट्टी हमारी आकाशगंगा है।