राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में 20 जून को किशोर के साथ हुई मारपीट में जांच कमेटी ने रिपोर्ट जिलाधिकारी मनीष कुमार को सौंप दी है। कमेटी ने घटना के लिए सहायक अधीक्षक और पाली इंचार्ज को जिम्मेदार माना है।
किशोर से मारपीट के मामले में जिलाधिकारी ने सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी जिसमें जिला प्रोबेशन अधिकारी सर्वजीत सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी रामशंकर पटेल व प्रवक्ता मनोविज्ञानशाला डॉ. असित कुमार मौर्य को शामिल किया गया था।
कमेटी ने संस्था में आवासित बच्चों, घटना के समय संस्था में उपस्थित कर्मचारियों, स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती किशोर का इलाज करने वाले चिकित्सक के बयान और 20 जून 2026 की सीसीटीवी फुटेज की जांच के आधार अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में यह सामने आया कि सहायक अधीक्षक राकेश कुमार चौरसिया ने पूर्व में आवासित बच्चों के बीच हुई बहस व गालीगलौज की घटना को गंभीरता से लिया होता तो दोबारा मारपीट न होती।
वहीं, मारपीट की घटना के बाद पाली इंचार्ज प्रदीप कुमार, केयर टेकर ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए कोई कार्रवाई नहीं की। वह केवल शिकायतकर्ता बालक व उसके परिवार को समझाने और किसी तरह मामले को समाप्त करते हुए दिखाई दिए जो घटना के प्रति उनकी उदासीनता को प्रदर्शित करता है। कमेटी ने संप्रेक्षण गृह में सीसीटीवी के फुटेज का स्टोर एक सप्ताह से बढ़ाकर एक माह तक किए जाने का सुझाव दिया है।
इसके अलावा कमेटी ने बच्चों के लिए प्रयोग में लाए जा रहे कमरों के अतिरिक्त अन्य कमरों की संख्या बढ़ाए जाने और नए कैमरे लगाए जाने की सिफारिश भी की है। हालांकि, कमेटी ने सीधे तौर सहायक अधीक्षक व पाली इंचार्ज को दोषी नहीं ठहराया है, क्योंकि शिकायतकर्ता किशोर के साथ पूर्व में हुई मारपीट की पुष्टि शिकायतकर्ता बालक के कक्ष में मौजूद अन्य बच्चों, भर्ती कराने ले गए कर्मचारी व अस्पताल में इलाज करने वाले चिकित्सक के बयान से नहीं हुई है।
जांच में दोबारा मारपीट की हुई पुष्टि
जांच में शिकायतकर्ता बालक के साथ 20 जून को दोबारा हुई मारपीट की पुष्टि हुई है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार अन्य आवासित बच्चों ने अपने बयान में यह स्वीकार किया है कि योगा क्लास रूम व टीवी देखने के लिए कमरे से बाहर चलने को लेकर शिकायतकर्ता बालक की अन्य दो बालकों से कई बार बहस व गाली-गलौज हुई और घटना वाले दिन भी शिकायतकर्ता बालक से गाली-गलौज की बात स्वीकार की गई। सीसीटीवी फुटेज व शिकायतकर्ता बालक के हाथ एवं पीठ पर कथित रूप से बताई गई चोट से यह प्रबल संभावना है कि 20 जून को अन्य दो बालकों की ओर से गाली-गलौज व संभावित हाथापाई की गई।
अन्य दो बालकों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की सिफारिश
जांच कमेटी ने शिकायतकर्ता बालक से मारपीट के अन्य दो आरोपी बालकों को किसी दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की सिफारिश की गई है। आशंका है कि अगर दोनों बालक राजकीय संप्रेक्षण गृह में रहते हैं तो अन्य किसी से मारपीट की घटना फिर हाे सकती है।
ये था पूरा मामला
- शिकायतकर्ता बालक व उसके परिवारवालों ने आरोप लगाया था कि उसके साथ पूर्व में संप्रेक्षण गृह में आवासित अन्य दो बालकों ने मारपीट की थी और उसकी हालत बिगड़ी तो उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद कोर्ट में पेश होने पर शिकायतकर्ता बालक को रिहा करने के आदेश दिए गए। 20 जून को जब वह अपने कपड़े व अन्य सामान लेने संप्रेक्षण गृह पहुंचा तो पूर्व में उससे मारपीट करने वाले अन्य दो बालकों ने फिर से उसे पीटकर लहूलुहान कर दिया।