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युवक की हत्या कर झाड़ियों में लाश फेंककर भागे हत्यारे

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Assassins run away by throwing a corpse in the bushes after killing a young man
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प्रयागराज। धूमनगंज में ऑटो ड्राइवर की हत्या के खुलासे को चंद घंटे भी नहीं बीते थे कि बेखौफ बदमाशों ने यहां हत्या की एक और वारदात को अंजाम दे दिया। शेरवानी मोड़ से सूबेदारगंज जाने वाले रास्ते पर बेरहमी से युवक को मौत के घाट उतार दिया। पहचान छिपाने के लिए ईंट-पत्थरों से उसका चेहरा भी कूंच दिया। काफी कोशिशों के बाद भी मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी।
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धूमनगंज में जीटी रोड पर स्थित शेरवानी मोड़ से रास्ता सूबेदारगंज की ओर जाता है। रविवार दोपहर मोड़ से 100 मीटर दूर रास्ते के किनारे स्थित झाड़ियों में 35 वर्षीय युवक का खून से लथपथ शव मिला। सूचना पर पुलिस पहुंची। मृतक के सिर व चेहरे पर गंभीर चोट के निशान थे। उसका चेहरा भी क्षतिग्रस्त था। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो फौरी तौर पर शव की हालत देखने से यही लगा कि सिर पर भारी चीज से वारकर पहले उसे मौत के घाट उतारा गया। फिर पहचान छिपाने के लिए ईंट-पत्थर से चेहरा कूंच दिया। खबर फैली तो आसपास के लोग भी जुट गए। पुलिस ने पूछताछ की लेकिन कोई भी मृतक के बारे में कुछ बता नहीं सका। मृतक के पास भी कुछ ऐसा नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी, जिसके बाद पुलिस ने शव कब्जे में लेकर मर्चरी भेज दिया। फिलहाल, अज्ञात शवों के हर मामलों की तरह इस मामले में भी पुलिस का यही कहना है कि हत्या कहीं और करने के बाद शव यहां लाकर फेंका गया। लेकिन, सवाल यह भी है कि आखिर कैसे हत्यारे शव को ठिकाने लगाकर निकल भागे और पुलिस को भनक नहीं लगी।
नहीं खुला कई हत्याओं का राज
प्रयागराज। वैसे धूमनगंज में हुई कई हत्याओं का राज अब तक नहीं खुल सका है। पिछले साल अगस्त में सुल्तानपुर निवासी इमरान की हत्या में नामजद दोनों दोस्तों को अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। इमरान की हत्या के बाद तेजाब से चेहरा जलाने की भी कोशिश हुई थी। इससे पहले दिसंबर 2018 में विष्णापुरी कॉलोनी में आनंद श्रीवास्तव की हत्या का भी खुलासा नहीं हो सका। उधर, धुस्सा जंगल में मारे गए ऑटो ड्राइवर विशाल की तरह ही अगस्त 2016 में इसी जंगल में राजरूपपुर निवासी मनोज कुमार की सिर कूंचकर हत्या करने वालों का भी अब तक सुराग नहीं हासिल हो सका है।
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