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मूल आपत्तियों पर एएसआई मौन, 24 घंटे में बताएं सफेदी की जरूरत है या नहीं : हाईकोर्ट

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल की जामा मस्जिद की रंगाई-पोताई मामले में मुस्लिम पक्ष की आपत्तियों पर एएसआई से 24 घंटे में हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि मस्जिद के बाहरी ढांचे पर सफेदी व सजावटी रोशनी की जरूरत है या नहीं। कोर्ट ने यह छूट भी दी है कि जांच के लिए जरूरी होने पर एएसआई की टीम वहां सर्वे कर सकती है। अब मामले की सुनवाई 12 मार्च को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने जामा मस्जिद कमेटी की पुनरीक्षण याचिका की शीघ्र सुनवाई की अर्जी पर दिया है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने सर्वे कर वीडियो फुटेज संग रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि रमजान के मद्देनजर मस्जिद में साफ-सफाई की जरूरत है, लेकिन रंगाई-पोताई की नहीं। इस पर मस्जिद कमेटी ने आपत्ति जताई है। बताया कि करीब सौ सालों से रमजान पर रंगाई पोताई कराती आ रही एएसआई अब इससे कतरा रही है। सर्वे के दौरान जानबूझकर उन जगहों की तस्वीरें नहीं पेश की गई, जहां रंगाई-पोताई बेहद जरूरी है। इस पर कोर्ट ने एएसआई से जवाब तलब किया था।
मामले में सोमवार को जवाब दाखिल करते हुए एएसआई ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। कहा कि एएसआई ने रंगाई-पोताई व सजावटी रोशनी लगाने से कभी इंकार नहीं किया, लेकिन मस्जिद कमेटी की ओर से विवादित स्थल की रंगाई-पोताई की मांग की जा रही है। इस पर अंतिम फैसला पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद ही लिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मस्जिद कमेटी की आपत्तियों के पैरा 6 व 7 पर एएसआई मौन है, जिसमें मस्जिद के बाहरी ढांचे पर सफेदी व सजावटी रोशनी की मांग की गई है। लिहाजा, एएसआई 24 घंटे में स्पष्ट जानकारी दे कि बाहरी ढांचे में रंगाई पोताई व सजावटी रोशनी की जरूरत है या नहीं।
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स्मारक के बाहरी भाग पर पपड़ी जरूर दिख रही है, लेकिन रंगाई पोताई की जरूरत नहीं है- मनोज कुमार सिंह, एएसआई के वकील
हमारी अर्जी रमजान पर सफेदी, अतिरिक्त रोशनी व सजावटी लाइटें लगाने की है। एएसआई कोर्ट को गुमराह करने के लिए मरम्मत कार्य की रिपोर्ट पेश कर रही है- एसएफए नकवी, मस्जिद कमेटी के वकील
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