चित्र परिचय------- जसरा बाजार में सड़क पर भरा बरसात का पानी ( संवाद न्यूज एजेंसी जसरा)
कहते है कि जाते-जाते मेघा फिर झूम कर बरसते हैं, इस बार यह कहावत सच साबित हो रही है। भादों के इस महीने में आसमान से ऐसी बारिश हो रही है कि जगह-जगह जलभराव हो गया। बुधवार को सुबह से शाम तक हुई बारिश कुछ किसानों के लिए वरदान तो कुछ के लिए अभिशाप बन गई।
इलाके में पिछले एक माह से हो रही बारिश से खेत-खलिहान तालाब में तब्दील हो गए हैं। बुधवार को दिनभर रुक-रुक कर कभी रिमझिम तो कभी जोरदार बारिश होती रही। इससे बाजारों में जलभराव हो गया और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर आवागमन बाधित हो गया। लोगों को घरों में ही दुबक कर रहना पड़ा। हालांकि इस आफत भरी बारिश को कुछ किसान अपने लिए वरदान मान रहे हैं।
ऊंचाई पर स्थित खेतों में काम कर रहे किसानों से बात की तो उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखी।जबकि जिन निचले स्थान पर स्थित खेतों में एक बार फिर जलभराव की स्थिति बन गयी है। मौसम विभाग के मुताबिक, पूर्वांचल में मानसून अब अंतिम दौर में है और अगले 2-3 दिनों में छिटपुट बारिश के बाद विदा ले लेगा।
कृषि विशेषज्ञ नरेंद्र मौर्या ने बताया कि इस समय हुई बारिश धान की फसल के लिए जीवनदायिनी है। खेतों में नमी बनी रहने से दाने की चमक और वजन दोनों बढ़ेगा।
जसरा बाजार में घरों में घुसा बारिश का पानी
दो घंटे की बरसात से जसरा बाजार में जलभराव हो गया। इससे लोगों के घरों में भी पानी भर गया और उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। बाजार में चारों तरफ पानी ही पानी फैल गया। नाली क्षतिग्रस्त होने के कारण जल निकासी के साधन बंद हो गए हैं। चार दशक पहले बनी नालियां अब पूरी तरह अस्तित्व विहीन हो चुकी हैं। जल निकासी न होने से सड़कों पर घरों का गंदा पानी भी फैला रहता है। जसरा नई बाजार में प्रधान की गली से सहकारी समिति की गली तक घुटने भर पानी जमा हो गया। ग्रामीण लंबे समय से जल निकासी के रास्ते साफ करने या नई नाली बनाने की मांग कर रहे हैं।