जैसे-जैसे धूप चढ़ी, छंटे आशंकाओं के बादल
0 दोपहर बाद आशंकाओं से उबरे फिर ढर्रे पर आई जिंदगी
0 सड़कों पर रहा सन्नाटा, शाम को बाजारों में आई रौनक
प्रयागराज। शुक्रवार की रात राम मंदिर मामले में फैसला आने की खबर ने संशय बढ़ दिया। अनहोनी की आशंका से सहमे लोग जरूरी सामान जुटाने लगे। देर रात तक खरीदारी हुई। सुबह संशय की स्थिति में कम लोग घरों से निकले। किसी ने दूध तो किसी ने सब्जी खरीदी। ज्यादातर लोग फैसले पर टकटकी लगाए रहे। दोपहर बाद जैसे-जैसे धूप चढ़ी, आशंकाओं के बादल छंटते गए। घरों में बैठे लोग बाहर निकलने लगे और जिंदगी फिर ढर्रे पर आने लगी। दिन में अन्य दिनों की अपेक्षा जहां सड़कों पर सन्नाटा रहा वहीं शाम को बाजारों में रौनक लौट आई।
सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर लोग दिन भर चर्चा करते रहे। लोग यह कहते सुने गए कि मंदिर भी बनेगा और मस्जिद भी तामीर होगी। इस बहुप्रतिक्षित फैसले की हलचल आम लोगों से ज्यादा प्रशासन और पुलिस महकमे में रही। चौराहों पर पुलिस की सक्रियता, बैरीकेडिंग, पुलिस के हूटर और अफसरों की चलहकदमी से लोगों को मामले की गंभीरता का एहसास हुआ। इससे पहले यहां के लोगों ने गंगा जमुनी तहजीब का परिचय देते हुए सौहार्द की ऐसी मिसाल कायम की, जिसे आगे याद रखा जाएगा। लोगों ने फैसला कर लिया था कि शहर की गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे की पहचान को आंच नहीं आने देंगे।
रातभर पुलिस के हूटरों ने लोगों की नींद रही। सुबह से फिर यही सिलसिला चल पड़ा। पुलिस और प्रशासन के कुछ ज्यादा ही एहतियाती उपायों ने सुबह शुरू के कुछ घंटों में लोगों ने घर से निकलने में परहेज किया। कटरा, मम्फोर्डगंज, सिविल लाइंस, चौक बाजार की दुकानें ही नहीं मोहल्लों की कुछ दुकानों को छोड़कर अन्य बंद रहीं। फिर दोपहर बाद रोजमर्रा की तरह दुकानें पूरी तरह खुलीं। शहर के सिविल लाइंस, कटरा, मम्मफोर्डगंज,शिवकुटी, गोविंदपुर, दारागंज, सलोरी, अल्लापुर, बैरहना, अलोपीबाग, कीडगंज, मुट्ठीगंज, बलुआघाट, अतरसुइया, मीरापुर, शास्त्रीनगर, करेलाबाग, सुलेम सराय, मुंडेरा समेत अन्य मिली-जुली आबादी वाले मोहल्लों में हिंदू हों या मुस्लिम, दोनों पड़ोसी धर्म का निर्वहन करते हुए रोज की तरह साथ बैठकर होटल में चाय की चुस्की लेने का क्रम बनाए रखा।
अल्लापुर में पूर्व पार्षद शिवसेवक सिंह, वरिष्ठ पार्षद कमलेश सिंह सुबह से घूम-घूम कर सौहार्द बनाए रखने की अपील करते रहे। छात्र शिवेंद सिंह दोस्तों के साथ सुबह रोज की तरह बाहर निकले और दोस्तों के साथ दही-जलेबी खाई। उनका कहना था कि वह कॅरियर बनाने आए हैं, उन्हें मंदिर-मस्जिद से मतलब नहीं सिर्फ पढ़ाई से है। वहीं मम्फोर्डगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल को ग्राहकी कम होने का मलाल रहा। उन्होंने अदालत के फैसले पर संतोष जताया, बोल, इससे अच्छा कुछ हो ही नहीं सकता।
गोविंदपुर कॉलोनी में रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक शिवहर नाथ मुंशी 92 साल की उम्र में भी फैसले के हर पहलू पर हमउम्र लोगों से देर शाम तक चर्चा करते रहे। शिवकुटी के रामयश पाल बोले, फैसला तो ठीक है, अच्छा यह रहा कि कहीं कुछ हुआ नहीं। तेलियरगंज के राकेश सिंह ने बताया कि दोपहर बाद दुकानें खुलीं, सब ओके रहा। सिविल लाइंस में बैरहना से मिठाई खरीदने आए पुरुषोत्तम दुबे ने कहा, सब समझदार हैं, फालतू में पुलिस हड़का रही है। बैरहना में प्रणव की दुकान पर प्लाई खरीदने तो दो ग्राहक आए, लेकिन अरसे बाद आसपास के दस लोग जुटे और शहर की स्थिति पर चर्चा करते रहे। दादा मियां की मजार के पास रहने वाले टेलर निहाल और अच्छे मियां ने कहा, हमें काम से मतलब, सब अपने भाई हैं। खुल्दाबाद चौराहा स्थित स्टार डेयरी पर बैठे बसपा के नगर अध्यक्ष चौधरी सईद अहमद ने कहा, शहरी अमन चैन पसंद है, कहीं कुछ गड़बड़ नहीं है। बस अफवाहों से सावधान रहना होगा। वहीं कल्याणी देवी निवासी बैंक कर्मी अनिल टंडन बोले, यह मुद्दा कई दशकों से देश को मथ रहा था। समाधान निकलने से सभी ने चैन की सांस ली है। देश के अमनचैन और विकास के लिए यह जरूरी था।
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गऊघाट में दोगुना बिका दोहरा
अफरातफरी के माहौल में चाय-पान की दिक्कत न हो, इसलिए कुछ लोगों ने इसके प्रबंध शुक्रवार की रात से ही करने शुरू कर दिए। गऊघाट में मिश्रा दोहरा कार्नर पर भीड़ ऐसी लगी थी, जैसे कुछ मुफ्त में बंट रहा हो। दुकानदार गुड्डू और हिमांशु दो लोगों के साथ रात 11.30 बजे तक पुड़िया बांधने में व्यस्त रहे। शनिवार सुबह आठ बजे से 11 बजे तक दिन भर में बिकने वाला दोहरा का डिब्बा खाली हो गया। उन्होंने बताया कि लोग दोगुना दोहरा खरीद रहे हैं। शाम को स्थिति सामान्य हो गई।
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स्कूलों की छुट्टी ने सूनी कर दी सुबह
स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी की छुट्टी से शनिवार सुबह स्कूली बसों और वाहनों की अवाजाही नहीं रहीं। उधर, घरों में टिफिन बनाने और बच्चों को तैयार करने से राहत पाकर महिलाएं ही नहीं बच्चे भी देर तक सोते रहे। सुबह उठने पर पुलिस की सक्रियता देख लोग गड़बड़ी के बावत परिचितों को फोनकर हालचाल लेते रहे।