ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भविष्य की मांग को देखते हुए इसका माॅडल तैयार किया जाएगा। इंटेलीजेंस आधारित इस तकनीक के फायदे हैं तो खतरे भी हैं। ऐसी कार बनाने को लेकर दुनिया के अन्य देशों में भी शोध चल रहे हैं।
भारतीय सूचना प्राैद्योगिकी संस्थान (टि्रपलआईटी) में चालक रहित कार का माॅडल तैयार किया जाएगा। इस काम में देश के तीन अन्य संस्थान और अमेरिका के एक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक सहयोग करेंगे। परियोजना के लिए भारत सरकार से दो करोड़ रुपये की मदद मिलेगी। साथ ही अमेरिका से पांच लाख डॉलर भी स्वीकृत हो चुके हैं।
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ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भविष्य की मांग को देखते हुए इसका माॅडल तैयार किया जाएगा। इंटेलीजेंस आधारित इस तकनीक के फायदे हैं तो खतरे भी हैं। ऐसी कार बनाने को लेकर दुनिया के अन्य देशों में भी शोध चल रहे हैं। टि्रपलआईटी के सेंटर ऑफ इंटेलिजेंट रोबोटिक्स के प्रमुख प्रोफेसर जीसी नंदी ने बताया कि इस परियोजना में आईआईटी जम्मू के डॉ. नलिन कुमार शर्मा, आईआईआईटी ग्वालियर के डॉ. राहुल काला, सीआईआर आईआईआईटी के डॉ. सूर्य प्रकाश भी शामिल हैं।
इसमें अमेरिका का सहयोगी विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय भी है। उन्होंने बताया कि परियोजना के लिए यूएस-एनएसएफ की ओर से आधा मिलियन अमेरिकी डॉलर स्वीकृत किए जा चुके हैं। वहीं डीएसटी की ओर से दो करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हमारी युवा टीम अगले तीन वर्षों तक परियोजना पर काम करेगी। चौराहों पर स्वचालित वाहनों का प्रयोग किया जाएगा।
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यातायात व्यवहार पर शोध होगा। बताया कि इंटेलिजेंट रोबोटिक्स को केंद्र की ओर से लगातार यह पांचवीं परियोजना दी गई है। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मुकुल शरद सुतावने ने इंटेलिजेंट रोबोटिक्स केंद्र को यह संयुक्त परियोजना पाने के लिए बधाई दी। कहा कि यूएस-एनएसएफ और डीएसटी जैसे प्रतिष्ठित संगठनों से पर्याप्त धनराशि मिलने से बेहतर काम होगा। इस परियोजना के जरिए हम भविष्य के लिए कुछ नया तैयार कर सकेंगे।