अपर निजी सचिव (एपीएस) परीक्षा-2010 में औपबंधिक रूप से चयनित आधा दर्जन अभ्यर्थियों के दस्तावेज उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने तलब कर लिए हैं। आयोग दस्तावेजों की जांच कराएगा। इन दस्तावेजों में अभ्यर्थियों के कंप्यूटर ज्ञान संबंधी प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। पिछले माह आयोग ने एपीएस-2010 में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आने के बाद छह अन्य अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किया जा चुका है और उनकी जगह छह नए अभ्यर्थियों के चयन की संस्तुति भी की जा चुकी है।
एपीएस-2010 परीक्षा पर सीबीआई की भी नजर है। सीबीआई को शिकायत मिली है कि इस परीक्षा में नियमों को ताक पर रखकर आयोग और शासन के तमाम अफसरों के करीबी रिश्तेदारों का गलत तरीके से चयन कर लिया गया। हालांकि, आयोग ने पिछले माह जब छह अभ्यर्थियों का चयन निरस्त किया तो यह शिकायत सही साबित हो गई कि एपीएस-2010 के चयन में फर्जीवाड़ा हुआ था। आयोग ने एपीएस के 250 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी। इनमें से 249 पदों का रिजल्ट जारी कर दिया गया और एक पद पर हाईकोर्ट का स्टे होने के कारण परिणाम रोक दिया गया। इनमें से आयोग ने 237 अभ्यर्थियों के चयन की संस्तुति शासन को भेजी थी। इसके बाद दूसरे चरण में छह अन्य अभ्यर्थियों के चयन की संस्तुति शासन को भेजी गई और छह अभ्यर्थियों का चयन औपबंधिक होने के कारण उनकी संस्तुति नहीं भेजी गई।
आयोग ने अब औपबंधित रूप से चयनित इन छह अभ्यर्थियों के सभी दस्तावेज जांच के लिए मांगे हैं। इन पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। हालांकि इनके बारे में कोई निर्णय दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही होगा। इनके अभिलेखों की जांच आयोग के विशेषज्ञ करेंगे। औपबंधिक रूप से चयनित इन अभ्यर्थियों को 11 जनवरी से एक फरवरी के बीच किसी भी कार्य दिवस में सुबह 10 से शाम पांच बजे तक आयोग कार्यालय के नियंत्रण कक्ष में उपस्थित होकर अपने शैक्षणिक अभिलेख प्रस्तुत करने हैं। अभ्यर्थियों को शैक्षणिक अभिलेखों की मूल प्रतियां भी मिलान के लिए साथ ले जाना होगा।