आरोप है कि फरवरी 2021 में चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी, दादरी को पता चला कि गोपाल पैथोलॉजी लैब में आम जनता को कोरोना वायरस का नि:शुल्क टीका लगाया जा रहा है और इसके बाद मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी को दी गई। जिसके बाद इस मामले की जांच डॉ. संजीव कुमार और ड्रग इंस्पेक्टर बागपत ने की। जांच के दौरान पाया गया कि एक एनजीओ के सहयोग से नि:शुल्क कोरोना टीकाकरण शिविर का आयोजन किया गया था और जब जांच अधिकारी लैब में पहुंचे तो एक व्यक्ति वैक्सीन का इंजेक्शन लगा रहा था।
पूछने पर जांच टीम को बताया कि वह लोग फ्लोर्स अस्पताल के कर्मचारी हैं और जिन्हें अस्पताल द्वारा टीकाकरण के लिए अधिकृत किया गया है, लेकिन जब निरीक्षण दल ने इस संबंध में कागज की मांग की, तो उनके पास इस संबंध में कोई कागजात नहीं मिले। याची के वकील कहना था कि वह निर्दोष है और उसे वर्तमान मामले में झूठा फंसाया गया है और वह इंस्टीट्यूट ऑफ क्लिनिकल रिसर्च इंडिया (आईसीआरआई) की देखरेख में देहरादून स्थित एक विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे एमएससी, क्लिनिकल रिसर्च का कोर्स कर रहा है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले के तथ्यों पर साक्ष्यों पर विचार करने के बाद जमानत अर्जी मंजूर कर ली है।