कोर्ट ने कहा कि निरसन अधिनियम की धारा-4 के तहत 1976 के कानून की धारा-33 में अपील का निहित अधिकार समाप्त हो गया था। निरसन अधिनियम कब्जा ली जा चुकी और नहीं ली गई भूमि के लिए अलग-अलग व्यवस्था करता है। जिन भूमि धारकों की जमीन का कब्जा नहीं लिया गया था, वे सामान्य कानून के तहत अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलें स्वतंत्र आधार पर भी सुनवाई योग्य नहीं थीं। भूमि का कब्जा लिए जाने के करीब 18, 20 और 27 वर्ष बाद अपीलें दाखिल की गईं, जबकि कानून में अपील के लिए केवल 30 दिन की समय सीमा निर्धारित थी। कोर्ट ने माना कि इतने लंबे समय तक चुप रहने और कार्यवाही को स्वीकार करने के बाद भूमि धारक अपील का अधिकार नहीं जता सकते। लिहाजा, कोर्ट ने जिला जज के फैसलों को निरसन अधिनियम के विपरीत और विरोधाभासी करार देते हुए तीनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं।