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हाईकोर्ट : सक्षम प्राधिकारी को भेजने के आदेश के खिलाफ  दाखिल अपील खारिज

Wed, 21 Sep 2022 11:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

श्री गुरुदत्त विद्यालय समिति की ओर से दाखिल विशेष अपील पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति एमएएच इदरीसी की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। मामले में एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश के खिलाफ  श्री गुरुदत्त विद्यालय समिति की विशेष अपील पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने  एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी है। एकलपीठ ने उपनिबंधक फंड, सोसायटी एवं चिट्स आगरा के नौ अप्रैल 21 के आदेश से याची की सूची को बोगस बता अस्वीकार करने एवं विपक्षी उमा पाठक की कमेटी की सदस्य सूची स्वीकार करने के आदेश को रद्द कर दिया था।कोर्ट ने उपनिबंधक को धारा 25(1) के तहत निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी को प्रेषित करने का आदेश दिया था।

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श्री गुरुदत्त विद्यालय समिति की ओर से दाखिल विशेष अपील पर न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति एमएएच इदरीसी की खंडपीठ सुनवाई कर रही थी। मामले में एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा है कि उपनिबंधक को देखना चाहिए कि साधारण सभा नियमानुसार हुई या नहीं। सदस्यता विवाद धारा 25 में तय करने का अधिकार सक्षम प्राधिकारी एसडीएम को है। उसे संदर्भित करना चाहिए था। 


मामले में याची पंजीकृत सोसायटी है। 2018 में हुआ चुनाव विवादित नहीं है। 15 पदाधिकारी चुने गए थे। बाबूराम शर्मा अध्यक्ष, सोम प्रकाश शर्मा प्रबंधक व सचिव चुने गए। दोनो की क्रमश: 25 जून 20 तथा सात फरवरी 20 को मौत हो गई। याची ने खाली पद भरने के लिए 13 अक्तूबर 20 को बैठक बुलाने की अर्जी दी। कहास गिरिराज सिंह को अध्यक्ष व कृष्ण कुमार माहेश्वरी को सचिव बनाया जाय। इस पर उपनिबंधक ने नोटिस जारी कर विपक्षी उमा पाठक व रामवीर सिंह से जवाब मांगा।
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बताया गया कि 12 जनवरी 20 की बैठक में रामबाबू शर्मा अध्यक्ष का इस्तीफा स्वीकार करते मुरारी लाल अध्यक्ष चुने गए। 14 फरवरी 20 की बैठक में उमा पाठक प्रबंधक, सचिव चुनी गई। उप प्रबंधक राजेश चंद्र शर्मा पद पर शुरू से बने रहे। याची और उमा पाठक दोनों ने उप निबंधक को सदस्यों की सूची भेजी। याची की बोगस बताकर विपक्षी की सूची मंजूर कर ली जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि उपनिबंधक को अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा उप निबंधक को धारा 25 (1) में सूची स्वीकार नहीं करनी चाहिए थी। ऐसे में उसके आदेश को रद कर सक्षम अधिकारी को भेजने का निर्देश दिया जिसके खिलाफ  अपील खारिज हो गई है।

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