सीबीआई ने रंगे हाथों दबोचा
रुपये न देने का मन बनाकर दंपती ने आठ सितंबर को सीबीआई से पूरे मामले की शिकायत कर दी। इसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाया। सहायक लोको पायलट इस मामले में एपीओ से मिलने के लिए डीआरएम कार्यालय पहुंचे। फोन पर लेनदेन की बात हो चुकी थी। लेकिन एपीओ ने वहां रुपये नहीं लिए और कार्यालय अधीक्षक से मिलने के लिए कहा। कार्यालय अधीक्षक ने शाम को अपने घर के पास मिलने के लिए बुलाया। जैसे ही सहायक लोको पायलट ने 50 हजार रुपये की पहली किस्त सौंपी, सीबीआई ने राजेंद्र मणि त्रिपाठी को रंगे हाथ दबोच लिया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि यह रकम एपीओ के इशारे पर ली जा रही थी। इसके आधार पर सीबीआई ने एपीओ अरविंद कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया।
आरपीएफ अफसरों की मौजूदगी में आरोपी एपीओ के कक्ष का खुलवाया गया ताला
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आधी रात तक मैराथन पूछताछ की। आरपीएफ अधिकारियों की मौजूदगी में डीआरएम कार्यालय के द्वितीय तल स्थित आरोपी एपीओ के कक्ष का ताला मध्य रात्रि के बाद खुलवाकर अहम कागजात जब्त किए। इसके बाद दोनों आरोपियों को लखनऊ ले जाया गया। वहां शुक्रवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया। रेलवे बोर्ड और उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के महाप्रबंधक नरेश पाल ने इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लिया है, जिसके चलते दोनों आरोपियों के खिलाफ निलंबन की विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई के बाद से प्रयागराज रेल मंडल में हड़कंप मचा हुआ है। डीआरएम ऑफिस में दिन भर एपीओ और कार्यालय अधीक्षक की तमाम विभागों में चर्चा होती रही।