एससी-एसटी एक्ट पर उठाई गई थी आपत्ति
सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता की ओर से आपत्ति उठाई गई। कहा गया कि एससी/एसटी एक्ट के तहत यह याचिका पोषणीय नहीं है। विचार किया गया कि जहां एसएसी/एसटी अधिनियम के तहत आरोपी को अग्रिम जमानत देने पर रोक लगती है। वहीं, पॉक्सो में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। कोर्ट ने पाया कि किसी भी असंगतता के मामले में पॉक्सो अधिनियम किसी भी अन्य कानून से अधिक प्रभावित होगा। इस मामले में पृथ्वी राज चौहान बनाम संघ और अन्य और रिंकू बनाम यूपी राज्य के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों का हवाला दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि जहां किसी आरोपी पर एससी/एसटी अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोप लगाया गया है तो पॉक्सो अधिनियम के तहत विशेष अदालत के पास जमानत याचिका निस्तारित करने का अधिकार क्षेत्र होगा। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में नाबालिग के साथ बलात्कार किया, जिससे शिक्षकों के प्रति लोगों का मन में डर का माहौल पैदा होगा। ऐसे अपराधियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।