इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में किशोर न्याय कानून एवं नियमों का पालन कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है और कहा है कि सरकार कानून व नियमों का पालन सुनिश्चित करें। याचिका की सुनवाई 23 जुलाई को होगी। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने बागपत के पवन तिवारी की जनहित याचिका पर दिया है।
याची का कहना है कि किशोर न्याय कानून एवं नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। इसका कड़ाई से पालन करने का समादेश जारी किया जाए। याची का कहना है कि ब्लॉक व ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समिति गठित नहीं की गई है। इसकी जिम्मेदारी है कि वह हर तीन हफ्ते में बैठक करे और बाल संरक्षण, शिक्षा स्वास्थ्य आदि की जांच करें। यह भी देखे कि बाल मजदूरी न हो, यौन शोषण न हो और उनका उत्पीड़न न होने पाए। ऐसी घटना की सूचना वह जिला बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण समिति, स्पेशल पुलिस यूनिट को भेजे। जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।
धारा 8(4) व धारा 86 (5) तथा धारा 8 (6) व 86(11) में स्पष्ट कहा गया है कि बाल कल्याण पुलिस अधिकारी सादे वेश में रहेंगे। बालिकाओं के लिए महिला पुलिस रहेगी। इन्हें पुलिस थाना, जिला समिति, कोर्ट आदि जगहों पर डिस्प्ले बोर्ड पर लिखा जाएगा। पुलिस अधिकारियों व यूनिट की सूचना दी जाएगी।
सभी अधिकारियों को प्रत्यावेदन भेजा गया है किंतु कोई जवाब नहीं दिया। एसपी बागपत से सूचना अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी तो बताया गया कि 2001 से 2021 तक बागपत जिले में एक भी केस दर्ज नहीं है। जिस पर कोर्ट ने कानून का पालन कर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का राज्य सरकार को निर्देश दिया है।