इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी प्रश्न का उत्तर देते समय गणना सही की गई है तो मात्र इकाई (रुपये, किलोमीटर, किलोग्राम आदि) साथ में नहीं जोड़ने पर उत्तर को गलत करार देना उचित नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के मामले में पुनर्मूल्यांकन में अभ्यर्थी का जवाब सही होने के बावजूद उसे अंक नहीं देने पर सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी और राज्य सरकार से बेहतर जानकारी मांगी है। कोर्ट में पेश उत्तर पुस्तिका को अगली सुनवाई 11 मार्च को दुबारा पेश करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनिरुद्ध नारायण शुक्ल की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज से याची की उत्तर पुस्तिका पेश करने का आदेश दिया था। अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अमित मनोहर सहाय ने उत्तर पुस्तिका पेश की। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता आर के ओझा ने उत्तर पुस्तिका देखने के बाद कहा कि याची ने सही उत्तर दिया है किंतु इस बार भी अंक नहीं दिया गया है। अधिवक्ता ने कोर्ट का ध्यान अनिरुद्ध नारायण शुक्ल और 118 अन्य बनाम राज्य सरकार के केस में हाईकोर्ट द्वारा 30 अक्तूबर 2018 को दिए आदेश की ओर ध्यान दिलाया।
इसी मामले में हाईकोर्ट ने कहा है कि जवाब सही है तो इकाई का जिक्र न करना मामूली गलती है और इसके आधार पर अंक नहीं काटा जा सकता है। याची ने जवाब सही दिया मगर साथ में रुपये नहीं लिखा है। कोर्ट ने सही उत्तर देने पर अंक देने का आदेश दिया था। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने समय मांगा है। सुनवाई 11 मार्च को होगी।