हर दिन अदालतों में हो रही हड़ताल से खफा इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देश और प्रदेश की बार कौंसिल और बार संघों से हलफनामे पर पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद हो रही हड़ताल पर कैसे काबू पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने की उनके पास क्या योजना है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी की खंडपीठ ने हड़तालों को लेकर स्वत: संज्ञान आपराधिक अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट की प्रति भी बार कौंसिल ऑफ इंडिया और यूपी बार कौंसिल को आत्मावलोकन के लिए सौंपने को कहा है जो यह दर्शाती है कि प्रदेश के लगभग सभी जिलों में अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण अदालती कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
जिला बार एसोसिएशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने कहा कि बार कौंसिल के साथ गहन मंथन करने की जरूरत है। इसी से इसका हल निकलेगा। इस संबंध ने बार कौंसिल ऑफ इंडिया की ओर से पेश अधिवक्ता गिरधर और यूपी बार कौंसिल के वकील अशोक कुमार तिवारी ने बार कौंसिल से निर्देश लिए जाने के लिए मोहलत मांगी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 16 जुलाई की तारीख तय करते हुए सभी बार कौंसिल और बार संघों से जवाबी हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।