फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनिल यादव के कार्यकाल की नियुक्तियां भी हों रद्द

Fri, 16 Oct 2015 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर अनिल यादव की नियुक्ति अवैध होने के बाद उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों की वैधानिकता पर भी सवाल खड़ा हो गया है। प्रतियोगियों की ओर से उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों को भी रद्द करने की मांग शुरू हो गई है। इस बारे में दशहरा बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है।
विज्ञापन


अनिल यादव के ढाई वर्ष के कार्यकाल में तकरीबन 250 तरह की भर्तियों में 40 हजार पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। इनमें से 237 तरह की तो सीधी भर्तियां  यानी, जिनमें सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर चयन हुआ। अनिल यादव की नियुक्ति रद्द होने के बाद ये भर्तियां भी फंसती दिख रही हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से उनके कार्यकाल में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग की याचिका पहले ही दाखिल हो चुकी है। प्रतियोगियों का कहना है कि अनिल यादव की नियुक्ति हाईकोर्ट ने अवैध कर दी है।

 इसलिए इनके समय में हुई भर्तियां भी अवैध हैं सो इन्हें रद्द किया जाना चाहिए। प्रतियोगियों के एक वर्ग ने इस मांग को लेकर आंदोलन करने की घोषणा की है। वहीं दूसरा वर्ग हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी में है। उनके कार्यकाल की नियुक्ति तथा भर्तियों की सीबीआई जांच के लिए आंदोलनों की अगुवाई के साथ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि इस पर विधिक राय ली गई है। अधिवक्ताओं के निर्देशन में याचिका तैयार कराई जा रही है। जल्द ही दाखिल की जाएगी।
विज्ञापन

000
सीबीआई जांच हुई तो कई की जाएगी नौकरी
0 इंटरव्यू और स्केलिंग में मनमानी के अलावा कई और गड़बड़ियां
0 किसी और ने किया मूल्यांकन तो ओएमआरशीट खाली छोड़ने का भी आरोप
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने अनिल यादव को उत्तर प्रदेश लोक आयोग के अध्यक्ष पद से हटा दिया है। अब सीबीआई जांच हुई तो अनिल और आयोग के कई अन्य अफसरों के अलावा पूर्व में चयनितों को भी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। अभ्यर्थियों के आरोप सही हैं तो भर्तियों में प्रारंभिक परीक्षा से लेकर साक्षात्कार तक में मनमानी हुई है। यहां तक कि परीक्षक के पैनल में जिनके नाम हैं उन्हाेंने कॉपियों का मूल्यांकन ही नहीं किया। इसके अलावा कई भर्तियों में अभ्यर्थियों के ओएमआर शीट (उत्तर पुस्तिका) खाली छोड़ने का भी आरोप है जिन्हें बाद में भरा गया। इस बाबत आरटीआई के तहत जानकारी मांगे जाने की तैयारी है।
पीसीएस-2011 की ही बात की जाए तो मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में स्केलिंग का मनमानी तरीके से इस्तेमाल हुआ। इस परीक्षा के एक ही पेपर में स्केलिंग के बाद जाति विशेष के लोगों के 60 से भी अधिक नंबर बढ़ गए। इसके विपरीत उसी पेपर में दूसरों के नंबर घट गए। इतना ही नहीं जाति विशेष के अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में 135 से 141 तक अंक दिए गए जबकि ज्यादातर अभ्यर्थियों को 121 तक अंक मिले। प्रतियोगियों ने ये डिटेल हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में भी लगाए हैं।

 उन्होंने  सीधी भर्ती के 23 भर्तियों का डिटेल जुटाया है। इसमें ओबीसी के लिए निर्धारित सीट से डेढ़ गुना से भी अधिक पद पर जाति विशेष के अभ्यर्थियाें का चयन हुआ है। प्रतियोगियों का दावा है कि उन्होंने 2008 में चयनित जाति विशेष  के अभ्यर्थियों की मार्कशीट शासन से हासिल की है। इनमें 72 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 50 में से 34 और 35 अंक मिले हैं। इन विवरणों को भी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
इनके अलावा प्रतियोगियों का आरोप है कि समीक्षा अधिकारी, राजस्व निरीक्षक की प्रारंभिक परीक्षा में कई अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट खाली छोड़ दिया था जिन्हें बाद में भरा गया। जांच पर पता चलेगा कि सभी ओएमआर शीट एक ही पेन से भरे गए हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश का आरोप है कि कई ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने कॉपियों का मूल्यांकन नहीं किया लेकिन पैनल में उनके नाम हैं। अवनीश का आरोप है कि इस बाबत आरटीआई के तहत जवाब मांगा जाएगा और साक्ष्य के रूप में इसे भी हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें