तीन दिन पहले सई नदी में पूर्व बीडीसी सदस्य का शव मिलने के मामले में केस दर्ज नहीं करने पर ग्रामीणों को आक्रोश फूट पड़ा। अचानक थाने पहुंचे ग्रामीणों को देख पुलिस के होश उड़ गए। थाने के घेराव के बाद भी पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और जांच का आश्वासन देकर सभी को घर लौटा दिया। पत्नी ने तहरीर देकर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
लालगंज कोतवाली के पंडित का पुरवा खालसा सादात निवासी पूर्व बीडीसी सदस्य अमरबहादुर यादव (40) बोलेरो की बुकिंग की बात कहकर 18 जून की रात साढ़े दस बजे निकला था। दो घंटे बाद उसकी बोलेरो घुइसरनाथ धाम स्थित सई नदी के पुल पर खड़ी मिली। काफी तलाश के बाद अमर बहादुर का शव दूसरे दिन सुबह नदी में डूबा मिला। मृतक का गमछा दूर पड़ा था। बोलेरो का गेट खुला था और उसकी एक चप्पल नीचे व दूसरी गाड़ी में पड़ी मिली।
मौके के हालात को देख मृतक पूर्व बीडीसी सदस्य की पत्नी ऊषा देवी ने शनिवार को सुबह हत्या का मुकदमा दर्ज करने की तहरीर दी है। इसमें कहा गया है कि पड़ोसी अनुराग जायसवाल ने उसे बुकिंग मिलने की बात पर फोन किया था, बाद में उसका शव संदिग्ध हालत में नदी में मिला। तहरीर के बाद भी सांगीपुर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं किया। जांच के नाम पर परिजनों को दौड़ाया गया। तीन दिन बाद भी केस दर्ज नहीं करने पर आखिरकार परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। रविवार को दोपहर परिजन व ग्रामीण सांगीपुर थाने का घेराव करने पहुंच गए।
अचानक थाने का घेराव देख पुलिस कर्मियों के होश उड़ गए। इसके बाद भी पुलिस ने परिजनों को प्रभारी निरीक्षक के क्राइम मीटिंग में होने व जांच के बाद केस दर्ज करने का आश्वासन देकर घर लौटा दिया। केस दर्ज करने पर मायूस ग्रामीण दो घंटे बाद घर लौट गए। हत्या का केस दर्ज करने में हीलाहवाली करने पर परिजनों व ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस बारे में जानकारी के सांगीपुर के प्रभारी निरीक्षक को फोन मिलाया गया तो उन्होंने मीटिंग में होने का संदेश भेजते हुए फोन काट दिया।
थाने में बेसुध हुई पत्नी और बच्चे
पूर्व बीडीसी सदस्य की रहस्यमय मौत के मामले में केस दर्ज कराने के लिए उसकी पत्नी व बच्चे दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। रविवार को जब ग्रामीण थाने में केस दर्ज कराने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे, तो मृतक की पत्नी ऊषा के साथ बच्चे शिवेंद्र (13), लक्ष्मी (10) व आयुाष (8) भी साथ थे। लेकिन तीन दिन से भूख प्यास से बेहाल पत्नी व बच्चे ज्यादा देर तक ग्रामीणों को साथ नहीं दे पाए। जिसके बाद पत्नी बेसुध होकर थाना परिसर में ही लेट गई और तीनों बच्चे बदहवास होकर बैठ गए। यह दृश्य देखकर भी पुलिस वालों को दिल नहीं पसीजा। हत्या का मुकदमा दर्ज किए बिना ही न्याय की फरियाद लेकर गए मृतक के पत्नी व बच्चों को थाने से लौटा दिया गया। सांगीपुर पुलिस की मनमानी से अभी कितनी ठोकरें मृतक के पत्नी व बच्चों को मिलनी है, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।