इलाहाबाद, 5 सितंबर। अफसरों के न मिलने से नाराज आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने सोमवार को विकास भवन के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। डेढ़ घंटे तक ताला लगा रहा और कार्यकत्रियां वहां धरने पर बैठी रहीं। ऐसे में विकास भवन में मौजूद अफसर और कर्मचारियों की स्थिति बंधक जैसी हो गई। बाद में अफसरों के साथ वार्ता होने पर मामला सुलझा और कार्यकत्रियों ने गेट खोला।
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां विभिन्न मांगों को लेकर दो सितंबर से कलमबंद हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि आंगनबड़ी कार्यकत्रियां एवं सहायिकाएं 41 वर्षों से गर्भवती, धात्री महिलाओं एवं शिशुओं को कुपोषण दूर कर सराहनीय काम कर रही हैं। कई दूसरे काम भी कार्यकत्रियों से लिए जा रहे हैं। इसके बावजूद कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये और सहायिकाओं को 1500 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। उनकी मांग है कि मानदेय बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाए और उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। इन मांगों को लेकर जिले भर से कार्यकत्रियां सोमवार को महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले डीएम को ज्ञापन देने कलक्ट्रेट पहुंचीं।
वहां बताया गया कि डीएम जिले से बाहर हैं। इसके बाद वह सीडीओ से मिलने विकास भवन पहुंची लेकिन सीडीओ से भी मुलाकात नहीं हो सकी। इस पर कार्यकत्रियां भड़क गईं और विकास भवन के मेन गेट पर ताला जड़ दिया। वहां हंगामे जैसे हालात बन गए। विकास भवन में मौजूद अफसर, कर्मचारी अंदर ही फंस गए और जो बाहर थे, वे बाहर ही खड़े रह गए। डेढ़ घंटे तक मुख्य गेट पर कार्यकत्रियों का धरना जारी रहा। इसके बाद जिला विकास अधिकारी ने कार्यकत्रियों से ज्ञापन लिया और उनके आश्वासन पर मामला शांत हुआ। धरना देने वालों में प्रदेश प्रभारी श्याम सूरत पांडेय, जिलाध्यक्ष मौजी लाल रावत, मंडल अध्यक्ष संतोष मिश्र समेत रीमा मिश्रा, सरोज फातिमा, सरला, सरोज श्रीवास्तव, रंजना, किरन, विमला, सविता, आशा, बबिता, विनीता, संगीता, रंजना आदि शामिल रहीं।