योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा है कि अब तक मेरी ओर से जितने भी मुद्दे उठाए गए हैं, उसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं बल्कि मठ, मंदिर और अखाड़े की संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना, बचाना है। मठ की संपत्तियों को बेचने से रोकना, टोकना ही मेरे लिए काल बन गया। यह सारे मुद्दे प्रयागराज की अस्मिता से जुड़े हैं।
बकौल स्वामी आनंद गिरि, मैं प्रयागराज के बुद्धिजीवियों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि दोनों को आमने-सामने बिठाकर मेरी ओर से उठाए गए तमाम मुद्दों की सत्यता को जाने, समझें और परखें। मै नार्को टेस्ट तक के लिए तैयार हूं। जो भी दोषी पाया जाए, उसे जेल नहीं फांसी की सजा दी जाए। मेेरे पास तमाम ऐसे सुबूत हैं लेकिन मैं अभी नहीं देना चाहता हूं।