योगगुरु स्वामी आनंद गिरि ने कहा है कि अब तक मेरी ओर से जितने भी मुद्दे उठाए गए हैं, उसमें मेरा कोई स्वार्थ नहीं बल्कि मठ, मंदिर और अखाड़े की संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना, बचाना है। मठ की संपत्तियों को बेचने से रोकना, टोकना ही मेरे लिए काल बन गया। यह सारे मुद्दे प्रयागराज की अस्मिता से जुड़े हैं।
बकौल स्वामी आनंद गिरि, मैं प्रयागराज के बुद्धिजीवियों से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि दोनों को आमने-सामने बिठाकर मेरी ओर से उठाए गए तमाम मुद्दों की सत्यता को जाने, समझें और परखें। मै नार्को टेस्ट तक के लिए तैयार हूं। जो भी दोषी पाया जाए, उसे जेल नहीं फांसी की सजा दी जाए। मेेरे पास तमाम ऐसे सुबूत हैं लेकिन मैं अभी नहीं देना चाहता हूं।
मैं पहले भी कह चुका हूं, मेरा परिवार से किसी भी तरह का कोई नाता नहीं रहा है। मैं किसी भी जांच समिति का सामना करने को तैयार हूं। जहां तक विवाह समारोह में पैसे लुटाने की बात है तो किसी परिचित के समारोह में आशीर्वाद और न्योछावर को ऐसे प्रस्तुत करना ओछी हरकत है।- महंत नरेंद्र गिरि, अध्यक्ष, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद.
मैंने मठ को वर्ष 2004 में भी देखा था और अब भी देख रहा हूं। आनंद गिरि जिस तरह के आरोप लगाकर संत समाज को बदनाम कर रहे हैं, वह उचित नहीं। यदि वह नहीं माने तो उन्हें संत समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा। - महंत हरिगिरि, महामंत्री अखाड़ा परिषद, अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक, जूना अखाड़ा