नरेंद्र गिरि ने इस पर नाराजगी जताई। दोनों के बीच विवाद की शुरुआत यहीं से हुई, लेकिन आनंद ने गुरु को मना लिया। धीरे-धीरे मठ और मंदिर दोनों पर आनंद का वर्चस्व हो गया। वह छोटे महाराज कहे जाने लगे। पूरी व्यवस्था आनंद ही देखने लगे। 2011 में नरेंद्र गिरि ने आनंद को उत्तराधिकारी बनाते हुए वसीयत कर दी। इसके बाद तो आनंद का हर तरफ जलवा ली जलवा हो गया। विवाद की शुरूआत 2018 में तब हुई जब आनंद गिरि ने गुरु को बताए बिना पेट्रोल पंप के लिए आवेदन कर दिया, वह भी बाघंबरी मठ की जमीन पर। यह सुनते ही नरेंद्र गिरि आगबबूला हो गए।
इसको लेकर जमकर विवाद हुआ। 2019 में निरंजनी अखाड़े से सचिव आशीष गिरि की मौत के बाद आनंद ने इशारों इशारों में नरेंद्र गिरि पर ही आरोप लगाया तो बात पूरी तरह से बिगड़ गई। इस बीच आनंद ने हरिद्वार में विक्रम योग पीठ आश्रम बना लिया। इसकी जानकारी भी गुरु को बाद में हुई थी। इन्हीं सब विवाद के बाद नरेंद्र गिरि ने नई वसीयत तैयार की जिसमें आनंद को हटाकर बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बना दिया।
Prayagraj News : योग गुरु आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि। फाइल फोटो
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