इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी भी फर्म को काली सूची में डालने या उस पर जुर्माना लगाने से पहले संबंधित फर्म को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने जुर्माना व जमानत राशि जब्त करने के साथ फर्म को काली सूची में डालने के डीएम के 29 जुलाई के आदेश को निरस्त कर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने सोनभद्र के मेसर्स बाबा खाटू इंडस्ट्रीज की याचिका निस्तारित करते हुए दिया। डीएम ने अवैध खनन के आरोप में याची फर्म की 1,07,43,587 रुपये की जमानत राशि जब्त करने के साथ ही उसे 2,35,56,096 रुपये जमा करने का निर्देश दिया था। साथ ही फर्म को खनन से दो साल के लिए प्रतिबंधित करते हुए उसे काली सूची में भी डाल दिया। याची ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपों के संबंध में सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया था। इसलिए डीएम का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। कोर्ट ने डीएम के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने डीएम को निर्देश दिया कि याची के अभ्यावेदन देने पर एक महीने के भीतर नए सिरे से विचार कर निर्णय लें।