दो माह बाद बदला गया बयान
मजिस्ट्रेट क समक्ष लगभग दो माह बाद दर्ज बयान में रक्तस्राव का उल्लेख किया गया। लेकिन, ऐसा बयान उस तथ्य का पुष्टिकरण नहीं कर सकता जिसकी गवाही अदालत में नहीं दी गई हो। इसलिए ट्रायल कोर्ट की ओर से केवल उस बयान के आधार पर दुष्कर्म मान सही नहीं कहा जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने पीड़िता की पूरी गवाही अस्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि आरोपी बच्ची को छत पर ले गया। उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। इसे बिना प्रवेश वाला गंभीर लैंगिक हमला मानते हुए कोर्ट ने आरोपी को पहले से काटी गई पांच वर्ष आठ माह की सजा को ही पर्याप्त माना और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी बरकरार रखा।