फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : केवल रक्तस्राव के दावे के आधार पर दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता, पॉक्सो के तहत सुनाई गई सजा निरस्त

Sat, 18 Jul 2026 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न के मामलों में केवल चोट का न होना, अपने आप आरोपों को खारिज नहीं करता। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। लैंगिक हमले का दोषी मानते हुए जेल में बिताई गई पांच साल आठ माह की सजा को ही पर्याप्त मानते हुए आरोपी को रिहा करने का आदेश दे दिया। 
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न के मामलों में केवल चोट का न होना, अपने आप आरोपों को खारिज नहीं करता। लेकिन, यदि अभियोजन स्वयं रक्तस्राव या शारीरिक चोट का विशेष दावा करे और उसी समय की मेडिकल जांच में किसी भी प्रकार की बाहरी या भीतरी चोट न मिले और इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी न हो, तो ऐसे में दुष्कर्म नहीं कहा जा सकता।

विज्ञापन


इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत सुनाई गई उम्रकैद की सजा को निरस्त कर दिया। साथ ही लैंगिक हमले का दोषी मानते हुए जेल में बिताई गई पांच साल आठ माह की सजा को ही पर्याप्त माना। यह आदेश न्यायमूर्ति सलील कुमार राय और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने वाराणसी निवासी सुनील की याचिका पर दिया।

आरोपी के खिलाफ वाराणसी के रोहनिया थाने में दुष्कर्म और पॉक्सो के मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले में पांच वर्षीय बच्ची की मां ने आरोप लगाया था कि घटना के बाद बच्ची के कपड़े और पैरों पर खून था। वहीं, घटना की रात हुए मेडिकल परीक्षण में शरीर पर कोई बाहरी अथवा भीतरी चोट नहीं मिली।

कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट में रक्तस्राव की बात नहीं कही और न ही दुष्कर्म का आरोप लगाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो माह बाद बदला गया बयान

मजिस्ट्रेट क समक्ष लगभग दो माह बाद दर्ज बयान में रक्तस्राव का उल्लेख किया गया। लेकिन, ऐसा बयान उस तथ्य का पुष्टिकरण नहीं कर सकता जिसकी गवाही अदालत में नहीं दी गई हो। इसलिए ट्रायल कोर्ट की ओर से केवल उस बयान के आधार पर दुष्कर्म मान सही नहीं कहा जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने पीड़िता की पूरी गवाही अस्वीकार नहीं की। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि आरोपी बच्ची को छत पर ले गया। उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया। इसे बिना प्रवेश वाला गंभीर लैंगिक हमला मानते हुए कोर्ट ने आरोपी को पहले से काटी गई पांच वर्ष आठ माह की सजा को ही पर्याप्त माना और 50 हजार रुपये का जुर्माना भी बरकरार रखा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें