प्रत्येक न्याय पंचायत में जल संरक्षण के उद्देश्य से एक-एक अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया था, लेकिन उचित जल प्रबंधन व्यवस्था के अभाव में ये सरोवर आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। लाखों रुपये की लागत से बने ये तालाब गर्मी शुरू होते ही सूख गए हैं।
बहरिया क्षेत्र के बसरही, कहली, गमरहटा, करनाईपुर, कटनई, सातनपुर, शीतलापुर समेत विभिन्न गांवों में बनाए गए करीब 60 प्रतिशत अमृत सरोवरों में पानी नहीं है। कई जगह केवल सूखी तलैया ही रह गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है। कई सरोवरों में इनलेट और आउटलेट व्यवस्था अधूरी रहने से वर्षा का पानी भी ठीक से एकत्र नहीं हो पाता। किनारों की पगडंडियां टूट चुकी हैं, बैठने की सुविधाएं जर्जर हैं और पौधरोपण भी अधिकांश स्थानों पर असफल है। अधिकारियों के अनुसार अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य केवल वर्षा जल संचयन है, इसमें नलकूप या अन्य बाहरी स्रोतों से पानी भरने का प्रावधान नहीं है। खंड विकास प्रशासन ने कहा है कि जिन स्थानों पर कमियां पाई गई हैं, वहां सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।