महेश गिरि का कहना है कि उनके गुरु के ब्रह्मलीन होने के दूसरे दिन ही आनन-फानन महंत प्रेम गिरि की चादर विधि कर दी गई, जबकि धूल रोट तीसरे दिन करने का विधान है। दूसरे दिन ही धूल रोट कर संन्यास परंपरा के खिलाफ कार्य किया गया। महंत महेश गिरि का कहना है कि यदि चादर विधि करनी ही थी तो कम से कम षोडशी का तो इंतजार किया गया होता। अमूमन षोडशी के दिन ही उत्तराधिकारी की घोषणा या चादर विधि की जाती है।
महेश गिरि बापू का कहना है कि श्रीमहंत अंबाजी तनसुख गिरि महाराज उनके चोटी गुरु थे। उनके मठ पर यदि कोई दावा पेश नहीं करता है तो वह अपना दावा करेंगे। सरकार इस मामले की जांच कराए, जो सही हो उसी की चादर विधि होनी चाहिए। श्रीमहंत हरि गिरि महाराज पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार महंत हरि गिरि महाराज के कारनामों की जांच कराए तो वह देश के सबसे बड़े घोटालेबाज साबित होंगे। महंत हरि गिरि और महंत प्रेम गिरि की ओर से जो भी किया जा रहा है वह असांविधानिक है। नियम के खिलाफ कार्यों का विरोध किया जाएगा।