खेल यहीं से शुरू हुआ। इसके बाद विवेचना में किशोरी की आयु के संबंध में एक दूसरा प्रमाणपत्र शामिल किया गया, जिसके आधार पर उसकी आयु 18 वर्ष दिखाई गई। फिर आरोपी का नाम मुकदमे से निकाल दिया गया। जबकि, उसके मां-बाप के खिलाफ गालीगलौज व धमकी देने के आरोप में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। मामला तब अफसरों के संज्ञान में आया जब उन्हें पता चला कि अब सीआरपीसी 169 के तहत रिपोर्ट भेजकर आरोपी को रिहा करवाने की तैयारी है। इसके बाद मामले की गोपनीय तरीके से जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है।
हालांकि, इस मामले में अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। सीओ कोतवाली सत्येंद्र प्रसाद तिवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। लेकिन ऐसा कुछ है तो समीक्षा की जाएगी। लापरवाही की बात सामने आई तो उचित कार्रवाई की जाएगी।