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अमरमणि त्रिपाठी सरेंडर करें, वरना होगी कुर्की : हाईकोर्ट

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अपहरण मामले में फरार चल रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी को तगड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती की एमपी एमएलए कोर्ट की ओर से पूर्व मंत्री की संपत्ति कुर्क करने के आदेश के खिलाफ दाखिल अर्जी खारिज की दी है। अब अमरमणि को विशेष अदालत में सरेंडर करना होगा, वरना संपत्ति कुर्क होगी। सरेंडर के बाद उनकी जमानत अर्जी पर बस्ती की अदालत ही फैसला लेगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को सुनाया। इससे पहले कोर्ट ने पूर्व मंत्री की ओर से दाखिल दस्तावेजों, सरकार की ओर से पेश हलफनामे में तथ्यों की भिन्नता पाए जाने पर ट्रायल कोर्ट की ऑर्डर शीट बंद लिफाफे में तलब की थी। अभियोजन की ओर से पेश दस्तावेजों में 36 आपराधिक मामलों का इतिहास हाेने की बात बताई, जबकि पूर्व मंत्री की ओर से केवल 20 मामलों का खुलासा किया गया था। हालांकि, सरकार की ओर से पेश आपराधिक इतिहास को काफी पुराना बता पूर्व मंत्री के वकील ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद कोर्ट ने 20 मार्च को फैसला सुरक्षित कर लिया था।
पूर्व मंत्री ने बस्ती के एमपी एमएलए कोर्ट की ओर से संपत्ति की कुर्की के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामला बस्ती के कोतवाली थाना क्षेत्र का है। छह दिसंबर 2001 को व्यापारी धर्मराज मद्धेशिया के बेटे राहुल का अपहरण हो गया था। उसे अमरमणि के लखनऊ आवास से बरामद किया गया था। मामले में कोतवाली थाने में पूर्व मंत्री अमरमणि समेत नौ पर अपहरण का मामला दर्ज किया गया था।
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विवेचना के बाद पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र पर बस्ती के एमपी एमएलए कोर्ट ने ट्रायल शुरू किया। इसके बाद पूर्व मंत्री को तलब किया था, लेकिन वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया था। फिर भी पुलिस उन्हें अदालत में पेश नहीं कर सकी थी। इस पर नाराज स्पेशल कोर्ट ने यूपी के प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को पूर्व मंत्री की संपत्ति की कुर्की के साथ ही हर हाल में 20 मार्च को अदालत के सामने हाजिर करने का आदेश दिया था।
स्पेशल जज की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि फरार अभियुक्त अमरमणि दुर्दांत और प्रभावशाली व्यक्ति है। उसका लंबा आपराधिक इतिहास है। उसके खिलाफ हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। स्थानीय पुलिस पूर्व मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही है।
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