यह प्रयागराज का अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। 50 वर्षों पुराना यह काम्प्लेक्स अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। इस काम्प्लेक्स से खिलाड़ियों की मेधा निकल कर ओलंपिक, एशियाड और विश्व कप जैसी बड़ी स्पर्धाओं तक पहुँच चुकी है। यहां बड़ी संख्या में खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। यहां के खेल छात्रावास में तमाम खिलाड़ी रहकर तैयारी कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यहां के खिलाड़ी और कोच से उनके मुद्दे पर बातचीत की गई और जानने का प्रयास किया गया कि नई सरकार से उन्हें खेल के लिए क्या उम्मीदें हैं।
ओलंपियन एवं अर्जुन अवॉर्डी अभिन्न श्याम गुप्ता का कहना है कि सबसे बड़ी कमी है की खिलाड़ियों के लिए नौकरी की सुविधा नहीं है। यह तब मिलती है जब आप नेशनल और इंटरनेशनल मेडल जीतते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। पहले डिस्ट्रिक्ट लेवल पर भी रेल और एजी ऑफिस जैसे विभागों में नौकरी मिलती थी जो पूरी तरह से ख़त्म हो गई है। खिलाड़ियों को ज़मीनी व बुनियादी सुविधाएं ही नहीं मिल पा रही हैं।
कई सेंटर पर परमानेंट कोच नहीं हैं। उनकी मॉनिटरिंग नहीं होती है। उड़ीसा जैसे राज्यों में बुनियादी सुविधा के साथ ज़मीनी स्तर तक खिलाड़ियों पर काम होता है। उत्तर प्रदेश में सुविधाएं ज़रूर बढ़ी हैं. लेकिन बुनियादी चीजें नहीं पूरी हो पा रही हैं। मेडल जीतने के बाद खिलाड़ियों पर धनवर्षा होती है। पैसों की ज़रूरत अभ्यासरत खिलाड़ियों को होती है। मेडल जीतने के बाद तो नौकरी मिल ही जाती है। सरकार को इनपर भी ध्यान देना चाहिए।
भारतीय बॉस्केटबाल टीम के पूर्व सदस्य आरएस बेदी का कहना है कि मेडल लाने वालों को नौकरी मिल रही है, लेकिन मेडल लाने वाले खिलाड़ियों पर ध्यान देना होगा। खेलो इंडिया, खेलो यूनिवर्सिटी का लाभ बड़े व अच्छे खिलाड़ियों को ही मिल रहा है। जमीनी स्तर के खिलाड़ियों को ऊपर लाने के लिए भी योजनाएं तैयार करनी चाहिए। ज़मीनी स्तर पर ही खिलाड़ियों को छांटकर उनको प्रशिक्षित करना होगा। इससे बड़ा फ़ायदा मिलेगा। सरकार की मिनी स्टेडियम की योजना बेहतर है, लेकिन उसे अमल में नहीं लाया गया है। इस पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए।
अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के प्रभारी संदीप गुप्ता ने कहा कि सरकार की खेलो इंडिया योजना बेहतरीन लेकिन कुछ कमियां भी हैं। खेलो इंडिया स्कूल गेम्स और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स होते हैं। चुनिंदा स्कूल के बच्चों को मौक़ा मिल रहा है। इसमें निचले स्तर के खिलाड़ियों को मौक़ा नहीं मिल पा रहा है। हर जिले के खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित होगी, तो खिलाड़ियों की भागीदारी भी बढ़ेगी। खेलो इंडिया का मंच अंतरराष्ट्रीय स्तर का है। जूनियर व सीनियर टीम का चयन इससे होगा तो मेडल की संख्या भी बढ़ेगी।
टेनिस खिलाड़ी आदित्य सिंह ने कहा कि टेनिस का फ़ेडरेशन नहीं होने से हम लोगों के करियर का बहुत नुक़सान हो रहा है। सरकार से यही चाहेंगे कि हमारा फ़ेडरेशन क्लियर हो। खेल कोटे से नौकरी बढ़े ताकि मेडल की भी संख्या बढ़े। सरकार खिलाड़ियों का ख़्याल रखे।
वॉलीबाल खिलाड़ी पीयूष राय का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतियोगिता नहीं हो रही है। पिछले चार सालों से वॉलीबॉल की कोई भी बड़ी प्रतियोगिता नहीं हुई। हम अभ्यास कर रहे हैं। कोच मेहनत कर रहे हैं। हम दोनों की मेहनत पर पानी फिर रहा है। इससे हम लोगों को काफ़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वॉलीबॉल खिलाड़ी शिव कुमार दुबे का मानना है कि खेल कोटे में नौकरी आनी लगातार कम हो रही है। हम खिलाड़ियों को करियर की चिंता सता रही है। यही हमारे चुनावी मुद्दे हैं। हम इसी को लेकर मतदान करेंगे।