इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी ने कहा कि वे इस्तीफा देने को हैं तैयार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश पर छह छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस ले लिया गया है। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू के खिलाफ राष्ट्रपति की जांच की संस्तुति के बाद बने दबाव के मद्देनजर इसकी पटकथा शुक्रवार को ही लिख दी गई थी। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने सोमवार को इसका आदेश भी जारी कर दिया। हालांकि, इस बाबत तीन सदस्यीय कमेटी गठित होने के बाद छात्रसंघ के पूर्व संयुक्त मंत्री श्रवण जायसवाल तथा दो अन्य छात्रों ने कुलपति के खिलाफ फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। इसकी वजह से श्रवण का निष्कासन वापस नहीं लिया गया।
प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए एबीवीपी के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों ने कुलपति दफ्तर पर ताला जड़ दिया था। इस आरोप में पांच अगस्त को छात्रसंघ के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, श्रवण जायसवाल, छात्र नेता आनंद सिंह निक्कू और सूर्य प्रकाश मिश्रा को निष्कासित कर दिया गया था। इनके अलावा सांस्कृतिक सचिव जितेंद्र शुक्ला, नलिनी मिश्रा, अनुभव उपाध्याय और हिमांशु को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर नलिनी का निलंबन पहले ही वापस हो चुका है। छात्र-छात्राओं के खिलाफ इस कार्रवाई ने राजनीतिक रूप ले लिया और कुलपति के खिलाफ जांच की संस्तुति में इसे प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इससे बने दबाव के बाद कुलपति के निर्देश पर शुक्रवार को तीन सदस्यीय कमेटी गठित ने सभी छात्र नेताओं का निष्कासन और निलंबन वापस लेने का निर्णय लिया। हालांकि, अन्य प्रक्रिया पूरी कर सोमवार को आदेश जारी करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा कुलपति को अगले दिन ही छुट्टी पर जाना था। इसी बीच श्रवण जायसवाल तथा दो अन्य निष्कासित छात्रों ने कुलपति के खिलाफ फेसबुक पर पोस्ट कर दिया। शनिवार को हुई बैठक में समिति के सदस्यों ने श्रवण की आपत्ति को काफी गंभीरता से लिया था। इसके मद्देनजर सदस्यों ने श्रवण को छोड़कर अन्य छात्रों का निष्कासन और निलंबन वापस लेने की संस्तुति कर दी। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर हर्ष कुमार ने बताया कि समिति की रिपोर्ट, डीएसडब्ल्यू के अनुमोदन तथा कुलपति के निर्देश पर छात्रों का निष्कासन और निलंबन वापस लेने का आदेश जारी कर दिया गया है।