कोविड 19 संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमों की वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई के लिए नई व्यवस्था लागू की है। यह उन सभी वकीलों और वादकारियों के लिए है, जो वीडियो कांफ्रेंसिंग से अपना मुकदमा बहस करना चाहते हैं। नई व्यवस्था 13 जुलाई से लागू होगी।
वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमा बहस करने के लिए हाईकोर्ट के गेट संख्या-3ए, 3बी, 5 के अलावा हाईकोर्ट मैदान के पवेलियन में केबिन बनाए गए हैं। यह केबिन हाईकोर्ट के इंटरनेट के जरिए जुड़े होंगे, लिहाजा यहां से मुकदमा बहस करने में नेटवर्क की समस्या नहीं आएगी। इनके जरिए 30 कांफ्रेंसिंग सेशन एकसाथ हो सकेंगे। हर कोर्ट के लिए टाइम स्लॉट अलग से दिया जाएगा। हर केबिन के बाहर अलग-अलग कोर्ट के लिए निर्धारित टाइम स्लॉट दिया रहेगा। इसे अलग से हाईकोर्ट की वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया जाएगा।
ई-सेवा केंद्रों से भी सुनवाई की सुविधा
हाईकोर्ट ने पहली बार वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई के लिए ई-सेवा केंद्रों की सुविधा शुरू की है। शहर विभिन्न हिस्सों में स्थित ऐसे आठ ई-सेवा केंद्रों की सूची दी गई है, जहां वकील हाईकोर्ट आए बिना अपने घर के नजदीक स्थित ई-सेवा केंद्र से वीडियो कांफ्रेंसिंग से मुकदमे में बहस कर सकेंगे। इसे ‘ऑफसाइट’ सुविधा का नाम दिया गया है। इसके अलावा वकील पहले ही अपने घर या ऑफिस से मोबाइल फोन, लैपटॉप या डेस्क टॉप के जरिए भी वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा ले सकेंगे।
पहले से देनी होगी सहमति
अधिवक्ता अपना मुकदमा ऑनसाइट (हाईकोर्ट गेट पर बने केबिन) या ऑफसाइट (ई-सेवा केंद्र) से करना चाहते हैं। इसका विकल्प उनको सुनवाई के एक दिन पहले ही दिन में एक बजे तक हाईकोर्ट की वेबसाइट पर देना होगा। ऐसा नहीं करने पर उनके मुकदमे में उस दिन सुनवाई नहीं हो सकेगी और मुकदमे में कोई दूसरी डेट दे दी जाएगी। वकीलों को केबिन में हेड सेट भी प्रदान किए जाएंगे, मगर अपेक्षा की गई है कि अधिवक्ता खुद का हेड सेट लेकर आएं। वीडियो कांफ्रेंसिंग से अच्छी सुनवाई के लिए वकीलों को अपने फोन या कंप्यूटर में गूगल क्रोम डाउनलोड करने की सलाह दी गई है।