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श्रृंगवेरपुर धाम में अब राम शयन स्थल के दर्शन

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शृंगवेरपुर धाम में अब राम शयन स्थल के दर्शन क्रासर लक्ष्मण के पहरा देने वाले स्थल का वीर आसन तीर्थ के रूप में कराया गया निर्माण सीताकुंड और संध्या घाट पर पूजा-परिक्रमा और आरती कर सकेंगे संत-भक्त, 29 करोड़ की परियोजना का पर्यटन विभाग को हस्तांतरण जल्द अनूप ओझा प्रयागराज। वनवास के दौरान भगवान राम ने शृंगवेरपुर में गंगा तट पर जहां रात गुजारी थी, वहां अब राम शयन स्थल के दर्शन होंगे। राम शयन स्थल के पास ही वीर आसन देश-दुनिया के पर्यटकों का ध्यान खींचेगा। साथ ही संत और भक्त वहां सीताकुंड की भी परिक्रमा कर सकेंगे। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसे जल्द ही पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। रामायण सर्किट थीम पर शृंगवेरपुर धाम का पर्यटन विकास सनातनधर्मियों को लुभाएगा। स्वदेश दर्शन योजना के तहत यहां शृंगी ऋषि के आश्रम के आसपास के घाटों, मंदिरों और पौराणिक स्थलों को आध्यात्मिक पर्यटन की दृष्टि से संवार दिया गया है। यहां आने वाले भक्त राम के वनवास से जुड़े स्थलों के दर्शन और भ्रमण के साथ ही रात्रि विश्राम भी सकेंगे। तीर्थयात्रियों को ठहरने के लिए वहां पर टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाया गया है। इस पर्यटन सुविधा केंद्र में एक साथ चार सौ से अधिक तीर्थयात्री ठहर सकेंगे। इस स्थल पर तीर्थयात्रियों के स्नान-ध्यान के लिए संध्या घाट का भी निर्माण कराया गया है। करीब 181 मीटर लंबे इस संध्या घाट पर संत-भक्त पूजा, ध्यान के अलावा गंगा आरती और दीपदान कर सकेंगे। घाट के ऊपर शृंगी ऋषि केजर्जर मंदिर को भी सुरक्षा दीवार बनाकर संरक्षित कर दिया गया है। पर्यटन विभाग की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार शृंगवेरपुर धाम वह भूमि है, जहां पर मां गंगा केतट पर माता शांता व शृंगी ऋषि की तपोभूमि व आश्रम स्थित है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह के मुताबिक यह स्थल सदियों से सनातनधर्मियों की आस्था का केंद्र रहा है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वन गमन के दौरान भगवान राम और सीता ने जहां प्रवास किया था, उससे चंद कदम दूरी पर लक्ष्मण धनुष-वाण के साथ रात भर पहरा दिए थे। ऐसे में उस स्थल को वीर आसन के रूप में भव्यता प्रदान की गई है। शृंगवेरपुर में मुखवती गंगा हैं। वहां गंगा और सीता संवाद के भी प्रमाण मिले हैं। इस आध्यात्मिक महिमा को देखते हुए वहां रामायण सर्किट थीम पर आधारित संध्या घाट और सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है, ताकि वहां आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके। कोट रामायण सर्किट थीम पर शृंगवेरपुर में आध्यात्मिक पर्यटन विकास की स्वदेश दर्शन परियोजना मूर्त रूप ले चुकी है। वहां आने वाले तीर्थयात्री अब भगवान राम के प्रवास स्थल से लेकर शृंगी ऋषि के आश्रम तक के स्थलों के दर्शन से धन्य हो सकेंगे। इसके लिए वहां ठहरने की भी व्यवस्था की गई है। दिनेश कुमार, उप निदेशक पर्यटन।
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