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Prayagraj News: व्हाट्सएप एवं मैसेज से जुड़े 3.50 लाख किसान

Thu, 24 Sep 2020 06:49 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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प्रयागराज। किसानों को किसी योजना की जानकारी के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा। उनसे संबंधित सभी तरह की जानकारी उनके मोबाइल पर तत्काल पहुंचेगी। इसके लिए ग्राम पंचायत और ब्लाक स्तर पर किसानों के व्हाट्सअप एवं मैसेज ग्रुप बनाए गए हैं। इनसे करीब साढ़े लाख किसान जुड़े हैं। योजनाओं की जानकारी नहीं होने की वजह से बड़ी संख्या में किसान इनके लाभ से वंचित रह जाते हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। वे भी हाईटेक हो गए हैं। जिला स्तर पर अधिकारियों, कर्मचारियों और कुछ प्रगतिशील किसानों के व्हाट्सअप गु्रप बनाए गए हैं। इसी तरह से ब्लाक स्तर पर भी व्हाट्सग्रुप बनाए गए हैं। इनके अलावा जिले में करीब साढ़े तीख किसानों के पास स्मार्ट फोन है और वे व्हाट्सअप का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे सभी सभी किसानों को ग्राम पंचायत स्तर पर व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर जोड़ा गया है।
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उपनिदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि व्हाट्सअप गुप के विभिन्न चैनल के माध्यम से किसानों से संबंधित जानकारी तत्काल उन तक पहुंच जाती है। उनका कहना है कि सब्सिडी पर उपकरण वितरण की योजना शुरू की गई है। इसकी जानकारी तथा पूरा डिटेल व्हाट्सअप की मदद से किसानों को भेजा गया। नतीजा रहा कि दो दिन में ही किसानों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया। 000 कृषक उत्पादक संगठन बनेंगे ग्रामीणों का आर्थिक आधार 0 जिले में बन चुके हैं दो दर्जन से अधिक एफपीओ, अब कृषि विभाग की तकनीकी टीम भी बनी हिस्सा प्रयागराज। खेती से संबंधित तीन बिल को लेकर शुरू विवाद के बीच कृषि उत्पादक संगठन (एफपीओ) की भूमिका बढऩे लगी है। ग्रामीणों के आर्थिक विकास में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है। खास यह कि कृषि विभाग की अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों की टीम भी इनका हिस्सा होगी, जो बाजार उपलब्ध कराने के साथ तकनीकी और कानूनी सलाह भी देगी।

जिले में दो दर्जन से अधिक एफपीओज का गठन हो चुका है। एफपीओ नई तरह की खेती, तकनीकी उपलब्ध कराने के अलावा सरकार से योजनाएं भी लेकर आएंगे। मत्स्य पालन, दुग्ध विकास, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण आदि के लिए भी इनकी मदद ली जा सकती है। एफपीओज के प्रोत्साहन के लिए अब कृषि विभाग को नोडल बनाया गया है। इसके अलावा तकनीकी सलाह, बाजार आदि के विकास के लिए विभाग की ओर से बजट का भी प्रावधान किया गया है।
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एफपीओ धरावत्स बायो एनर्जी फार्मर प्रोड्यूसर के निदेशक त्रिभुवन नाथ पटेल ने बताया कि एक एफपीओ में 500 से 1000 तक किसान शामिल हो सकते हैं। समूह में खेती की वजह से खेती पर लागत कम आएगी। इसके अलावा उन्नत किस्म के बीज, खाद आदि के भटकना नहीं होगा। इतना ही नहीं किसानों के उत्पाद खरीदने के लिए व्यापारी भी खुद आएंगे। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार का कहना है कि सामूहिक खेती में एफपीओज की भूमिका बढ़ गई है। कई एफपीओï ने व्यवसायिक तरीके से खेती की शुरुआत की है। काले धान, फूल आदि की खेती के लिए विभाग की ओर से भी मदद की योजना बनाई गई है।
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