इविवि में नए कुलपति को लेकर ‘बाहरी बनाम शहरी’ पर फिर बहस छिड़ गई है। इतिहास दोहराएगा या परंपरा टूटेगी, इस पर सभी की निगाहें लगी हुईं हैं। सर्च कमेटी इंटरव्यू पूरा कर चुकी है और पांच नाम लिफाफे में बंद कर शिक्षा मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं। मंत्रालय यह नाम विजिटर यानी राष्ट्रपति को भेजेगा और राष्ट्रपति ही इविवि के स्थायी कुलपति के नाम पर अपनी अंतिम मुहर लगाएंगे।
उम्मीद तो यही की जा रही है कि सितंबर में इविवि को नया कुलपति मिल सकता है, लेकिन कुलपति पद के दावेदार जिस तरह से पद के लिए गुजरात से लेकर दिल्ली और संघ तक में कनेक्शन ढूंढ रहे हैं, उनकी जोर आजमाइश प्रक्रिया को और अधिक पेचीदा बना सकती है। अब इविवि के विजिटर पर निर्भर करता है कि वह किसके नाम पर अंतिम मुहर लगाते हैं। हालांकि, प्रावधान यह भी है कि विजिटर को अगर पैनल पसंद नहीं आता है तो वह उसे वापस भेज सकते हैं, लेकिन ऐसा बहुत कम हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक सर्च कमेटी ने जिन पांच नामों का पैनल भेजा हैं, उनमें से तीन शिक्षक इविवि से ताल्लुक रखते हैं, जबकि दो बाहरी हैं। एक शिक्षक वर्तमान में इविवि में ही तैनात हैं, जबकि इविवि से जुड़े दो अन्य शिक्षकों की वर्तमान तैनाती दूसरे संस्थानों में है। वहीं, दो बाहरी शिक्षकों में एक शिमला विवि और दूसरे पुणे के एक शिक्षण संस्थान में प्रोफेसर हैं। बहस अब बाहरी बनाम शहरी पर छिड़ गई है।
केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद नियुक्त वीसी बाहरी ही रहे
इविवि को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद नियुक्त किए गए सभी स्थायी कुलपति बाहरी रहे हैं। इविवि को वर्ष 2005 में केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला था। केंद्रीय विवि के पहले कुलपति हैदराबाद केंद्रीय विवि के प्रो. राजेन हर्षे थे। उन्होंने पांच साल का कार्य पूरा किया और उनके बाद बॉम्बे आईआईटी के प्रो. एके सिंह को स्थायी कुलपति नियुक्त किया गया।
हालांकि, विवादों के कारण उन्हें साढ़े तीन साल बाद इस्तीफा देकर जाना पड़ा। इसके बाद डेढ़ साल तक इविवि कार्यवाहक कुलपतियों के भरोसे रहा। इस दौरान प्रो. एनआर फारूकी और प्रो. ए. सत्यनारायण ने कार्यवाहक कुलपति की जिम्मेदारी निभाई। दिसंबर 2015 में हैदराबाद केंद्रीय विवि के प्रो. रतन लाल हांगलू को इविवि का स्थायी कुलपति नियुक्त किया गया। हालांकि, वह भी विवादों में घिरे रहे और चार साल में इस्तीफा देकर यहां से चले गए। प्रो. हांगलू ने 31 दिसंबर 3019 को इस्तीफा दिया और तब से इविवि के स्थायी कुलपति का पद खाली चल रहा है।
क्या इस बार टूटेगी पंरपरा?
इविवि में कुलपति की नियुक्ति को लेकर क्या इस बार परंपरा टूटेगी? यह सवाल सभी के मन में है। इविवि के ही कुछ शिक्षक मानते हैं कि विवि में नियुक्त पिछले दो कुलपति भले ही विवादों में घिरे रहे हों, लेकिन उन्हें इसी आधार पर कुलपति नियुक्ति किया गया था कि किसी बाहरी को भेजा जाएगा तो वह विवि की आंतरिक राजनीति में उलझने के बजाय काम करेगा। वहीं, कुछ शिक्षकों का मानना है कि कुलपति इविवि से जुड़े किसी शिक्षक को ही होना चाहिए, जो यहां आने से पहले जानता हो कि विवि में क्या कमियां हैं। नए कुलपति को तो एक साल समस्या को समझने में बीत जाता है।