इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि)
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प्रयागराज। इविवि के कुलपति पद के दावेदार एक शिक्षक की अर्हता को लेकर उठे विवाद पर विवि प्रशासन शिक्षा मंत्रालय को सही जवाब नहीं भेज पा रहा है। हालांकि, शिक्षक की अर्हता से संबंधित सभी दस्तावेज विवि में उपलब्ध हैं, लेकिन इविवि प्रशासन मंत्रालय को जवाब भेजने में बार-बार गलती कर रहा है। मंत्रालय के पूछने पर विवि प्रशासन ने तीसरी बार जवाब भेजा है।
कुलपति पद के लिए पांच शिक्षकों के नाम का पैनल शिक्षा मंत्रालय को भेजा चुका है। इस पैनल में इविवि से जुड़े एक शिक्षक की अर्हता को लेकर मंत्रालय में शिकायत की गई थी। चर्चा है कि इविवि के रिकार्ड में संबंधित शिक्षक की अर्हता को लेकर स्थिति स्पष्ट है। इसके बाद भी इविवि प्रशासन की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा है। पहली बार इविवि प्रशासन की ओर से जो जवाब भेजा गया, उससे इविवि प्रशासन के ही कुछ अफसर संतुष्ट नहीं थे। जवाब में शिक्षक की प्रोफेसर पद पर अर्हता एक जनवरी 2009 बताई गई थी।
बाद में इविवि प्रशासन ने शिक्षा मंत्रालय को दूसरा जवाब भेजा, जिसमें कहा गया कि पहले जवाब में कुछ तथ्यात्मक गलतियां थीं। इस बार मंत्रालय को बताया गया कि संबंधित शिक्षक की प्रोफेसर पद पर अर्हता की वास्तविक तिथि 29 सितंबर 2010 है। चर्चा है कि इविवि प्रशासन अपने ही जवाब में उलझ गया और मंत्रालय ने तीसरा पत्र जारी करते हुए स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट करने को कहा, क्योंकि दूसरे पत्र में भी जो जवाब भेजा गया था, उसमें कुछ महत्वपूर्ण तथ्य शामिल नहीं किए गए थे।
मंत्रालय की ओर से तीसरी बार जारी किए गए पत्र में कहा गया है कि इविवि प्रशासन की ओर पहली बार भेजे गए जवाब में बताया गया था कि इविवि की 20 दिसंबर 2018 को हुई कार्य परिषद में संबंधित शिक्षक की प्रोफेसर पद पर अर्हता तिथि एक जनवरी 2009 निर्धारित की गई थी, लेकिन इविवि प्रशासन की ओर से दूसरी बार भेजे गए जवाब में इस तथ्य की जानकारी नहीं दी गई। मंत्रालय ने अब इस मसले पर तीसरी बार विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सूत्रों के मुताबिक इविवि प्रशासन ने तीसरे पत्र का जवाब भी भेज दिया है।
शिक्षा मंत्रालय की ओर से जो भी पत्र आए थे, उन सभी का जवाब इविवि प्रशासन की ओर से भेज दिया गया है।
-डॉ. शैलेंद्र मिश्र, पीआरओ, इविवि