इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में क्रेट में चयनित अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। पीएचडी प्रवेश में जिन्होंने धांधली की शिकायत की, उनके मामले में इविवि प्रशासन अब तक कोई निर्णय नहीं ले सका और न ही उन अभ्यर्थियों के बारे में कोई फैसला हुआ, जिनका चयन पीएचडी प्रवेश के लिए हो चुका है। मामला अब हाईकोर्ट में है।
क्रेट में धांधली की शिकायत पर कुलपति प्रो. आरआर तिवारी ने 31 जनवरी को पीएचडी प्रवेश निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। साथ ही निर्देश दिए थे कि पंद्रह दिनों के भीतर इंटरव्यू दोबारा कराकर चयनितों की नई सूची तैयार कर ली जाए। कुलपति के आदेश से पूर्व 48 अभ्यर्थियों को पीएचडी प्रवेश के लिए चयन हो चुका था और इनमें से ज्यादातर छात्राएं हैं।
चयनित छात्र-छात्राओं कुलपति के आदेश का विरोध कर रहे हैं और मांग कर रहे है कि कुलपति अपना आदेश रद्द करते हुए पूर्व में चयनित अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराएं। इस पूरे विवाद में नुकसान केवल छात्र-छात्राओं को हो रहा है। वाणिज्य संकाय के डीन प्रो. असीम मुखर्जी का कहना है कि मामला न्यायालय में है। ऐसे में न्यायालय का आदेश आने के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया पर कोई निर्णय लिया जाएगा।
प्रवेश परीक्षा के लिए एजेंसी का चयन जल्द
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की प्रवेश मई में प्रस्तावित है। परीक्षा का आयोजन एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा, सो एजेंसी के चयन के लिए इविवि प्रशासन ने टेंडर निकाल दिया है। इविवि प्रशासन की ओर से 15 फरवरी को जारी टेंडर में एजेंसियों से 21 दिनों के भीतर आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद टेंडर फाइनल किया जाएगा। इविवि की प्रवेश समिति स्नातक, परास्नातक एवं संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा की तिथि भी प्रस्तावित कर चुकी है लेकिन इस पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है। एजेंसी का चयन होने के बाद उसकी सहमति से परीक्षा की प्रस्तावित तिथि पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। परीक्षा समिति का लक्ष्य है कि जून तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
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