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इलाहाबाद विश्वविद्यालयः घातक साबित हुआ सात साल पुराना बदलाव

Mon, 20 May 2019 12:58 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव को लेकर वर्ष 2012 में हुआ बदलाव ही छात्रसंघ के लिए घातक साबित हुआ। सिर्फ एक बार चुनाव लड़ने की अनिवार्यता लागू होने से छात्र नेता आम छात्रों से दूर होते गए और यह दूरी उन्हें दूसरे रास्तों पर ले गई। 
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वर्ष 2005 के छात्रसंघ चुनाव में एक प्रत्याशी की हत्या के बाद वर्ष 2006 से 2011 तक चुनाव नहीं कराया गया। वर्ष 2012 में छात्रसंघ बहाल हुए लेकिन कई बदलवों के साथ। पहले अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के लिए शर्त थी कि इस पद का प्रत्याशी पहले महामंत्री, संयुक्त मंत्री या किसी अन्य पद का चुनाव लड़ चुका है। इसके पीछे मंशा यही थी कि इस प्रक्रिया के तहत छात्र नेता आम छात्रों की समस्याओं को ज्यादा बेहतर ढंग से समझ सकेंगे लेकिन वर्ष 2012 में सबकुछ बदल गया और अधिकतम एक बार चुनाव लड़ने की अनिवार्यता लागू कर दी गई। 

इसके बाद कोचिंग संस्थानों, व्यापारियों से वसूली की शिकायतें आने लगीं। छात्र नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने का सिलसिला तेज हो गया। छात्र नेता एक वर्ष तक पदाधिकारी रहते और जब तक आम छात्रों की समस्याओं को समझ पाते, तब तक उनका कार्यकाल समाप्त हो जाता। जानकार मानते हैं कि यही बदलाव छात्रसंघ के लिए घातक साबित हुआ और छात्रसंघ को यह अलग रास्ते पर लेकर गया।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल लागू करने की तैयारी है। छात्रनेताओं द्वारा शहर के डॉक्टरों, व्यापारियों और कोचिंग संचालकों से वसूली की तमाम शिकायतें थाने में दर्ज है। अराजकतत्वों ने विश्वविद्यालय छात्रावास के 400 से ज्यादा कमरों पर अवैध कब्जा कर रखा था। कई कमरों से बम और बारूद बरामद किया गया।

छले दिनों कई छात्रनेता हत्या जैसे संगीन अपराध में लिप्त पाए गए। कई छात्र नेताओं पर पर पुलिस ने ईनाम घोषित कर रखा है। छात्रसंघ धनबल, बाहुबल और वसूली का पर्याय बन कर रह गया था। गिनेचुने छात्र नेताओं को छोड़ कर आम छात्रों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। शांत वातावरण में पठन-पाठन का माहौल विश्वविद्यालय की पहली प्राथमिकता है। जो भी इसे बाधित करेगा विश्वविद्यालय प्रशासन उससे सख्ती से निपटेगा। छात्र परिषद में छात्रों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होगा। 

छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने छात्रसंघ और छात्र परिषद के मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रसंघ को समाप्त किए जाने की तैयारी को अलोकतांत्रिक करार देते हुए छात्रसंघ उपाध्यक्ष अखिलेश यादव और उपमंत्री सत्यम सिंह सनी ने बैठक कर कहा कि इविवि प्रशासन छात्रसंघ को खत्म करने की साजिश कर रहा है ताकि इविवि प्रशासन अपनी खामियों पर पर्दा डाल सके।

विश्वविद्यालय की रैंकिंग लगातार गिर रही है और कुलपति के पास कोई जवाब नहीं हे। इसका ठीकरा छात्रसंघ पर फोड़ा जा रहा है। उधर, दिशा छात्र संघ संगठन के कार्यकर्ताओं ने छात्रसंघ को भंग कर छात्र परिषद के गठन की तैयारी पर अपना विरोध दर्ज कराया। संगठन के सदस्यों ने कहा कि छात्र परिषद का गठन छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को समेटने, सिकोड़ने और खत्म करने की साजिश है। बैठक में अंगद, अविनाश, धर्मराज, अंबरीश, अंजलि, महाप्रसाद आदि मौजूद रहे।
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