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वैश्विक समुदाय को आपदाओं, बीमारियों से लडने में सक्षम बनाएं

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- इविवि के के बनर्जी सेंटर की ओर से आयोजित ऑनलाइन संगोष्ठी में देश की समस्याओं पर चर्चा
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-युवा मस्तिष्क को राष्ट्रीय हित की चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर कार्य करने हेतु आगे आना
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के के बनर्जी सेंटर फॉर आटोमोस्फेरिंक एण्ड ओसियन स्टडीज की ओर से अप्रोचिंग द कंटाजियस डिजीजेज फ्राम अ जिओस्पाटियल पर्सपेक्टिव विषयक दो दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी में देश के जाने माने विशेषज्ञों ने कांफ्रेंस के विषय से जुड़े विविध आयामों पर चर्चा की। चर्चा मात्र जिओस्पाटियल एनालिटिक्स, गणितीय मॉडलिंग, विजुअलाइजेशन और बिग डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा माइनिंगए ड्रोन और इंटरनेट मैपिंग टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रही बल्कि इससे जुड़े सामाजिक.आर्थिक पहलू, निर्णय निर्माण में भूमिका और भविष्य के शासन विषयक चर्चा भी हुई।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय बौद्धिक शिक्षण प्रमुख स्वांत रंजन रहे। उन्होंने युवा मस्तिष्क को राष्ट्रीय हित की चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया। सम्मेलन के केंद्रीय विषय की प्रशंसा की और सुझाव दिया कि वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीक विकसित करनी चाहिए जो वैश्विक समुदाय को बीमारियों के साथ-साथ अन्य असुरक्षित खतरों और आपदाओं से लडने में मदद कर सके। उन्होंने सामाजिक आवश्यकताओं पर केन्द्रित वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।
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सम्मेलन में पहले सत्र में वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के निदेशक डॉ. कलाचंद सैन ने भू.विज्ञान की चुनौतीपूर्ण समस्याओं के बारे में भी बात की। भारत मौसम विज्ञान वएऐभाग के डॉ. केजे रमेश ने जलवायु परिवर्तन, वायु गुणवत्ता और पर्यावरण चुनौतियां और अवसर पर व्याख्यान दिया। सम्मेलन के समन्वयक प्रो. सुनीत द्विवेदी पूरे आयोजन के बारे में जानकारी दी जबकि समन्वयक डॉ. शैलेंद्र राय ने सत्र का संचालन किया।
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