इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी में शोध को बढ़ावा देने के लिए पहली बार भारत सरकार ने एक करोड़ रुपये की धनराशि दी है। इसके अलावा इविवि को तीन पीएचडी की सीटें भी मिली हैं। इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से विश्वेश्वरैया पीएचडी योजना चरण-दो के तहत इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी में उच्च कोटि के गुणवत्ता शोध के लिए देशभर से जनवरी में आवेदन मांगे गए थे।
इविवि के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीलेश आनंद श्रीवास्तव को विवि की ओर से नोडल ऑफिसर नामित किया गया था। अनुदान मिलने पर कुलपति संगीता श्रीवास्तव ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए पूरे समर्पण भाव से कार्य करने को कहा। भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पहली बार इस योजना के अंतर्गत इविवि इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी में शोध को बढ़ावा देने के लिए डॉ. नीलेश के प्रस्ताव को स्वीकार कर 1,08,99,400 रुपये का अनुदान दिया है।
अनुदान में मंत्रालय ने छात्रों की फेलोशिप, एचआरए, लैब सेटअप, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और संस्थान के ओवरहेड के खर्चों को कवर करने के लिए इविवि को इस बजट पर व्यय की मंजूरी दी है। इससे इविवि के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन विभाग में, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं, वीएलएसआई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग इत्यादि अत्याधुनिक शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
शोध छात्रों को हर माह 38,750 रुपये की फेलोशिप
अनुदान राशि से पहले दो साल शोधार्थी को 38,750 रुपये प्रति माह और इसके बाद तीन साल के लिए 43,750 रुपये प्रति माह की फेलोशिप मिलेगी। इसके अलावा फेलोशिप राशि का 16 प्रतिशत किराया प्रतिपूर्ति भी इस योजना के तहत मिलेगा। पीएचडी अवधि के दौरान अनुसंधान से संबंधित खर्चों के लिए प्रति वर्ष 1.20 लाख रुपये मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने पर मिलेगा 1.5 लाख रुपये
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लेने के लिए प्रत्येक शोधार्थी को 1.5 लाख रुपये मिलेंगे। तीसरे वर्ष से सभी नामांकित पूर्णकालिक शोधार्थियों को छह महीने के लिए विदेश में प्रयोगशालाओं का दौरा करने का मौका भी मिल सकता है। विदेश यात्रा के दौरान छह महीने के लिए शोधार्थियों की मासिक फेलोशिप 1.50 लाख रुपये होगी और 1.5 लाख रुपये तक का यात्रा/वीजा लागत भी मिलेगी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहास में प्रथम महिला कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के प्रबुद्ध एवं प्रेरक मार्गदर्शन में यह संभव हो पाया।
- डॉ. नीलेश आनंद, योजना के नोडल अफसर