प्रो. शास्त्री ने दान में मिले करोड़ों रुपये की अनियमितता के लगाए अरोप
कहा, दीक्षांत समारोह वाले दिन यूजीसी के सामने करेंगे धरना-प्रदर्शन
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पुरा छात्र रंजीत टोपा की ओर से इलाहाबाद विश्वविद्यालय को दान में दिए गए करोड़ों रुपये के घोटाले के मुद्दे ने फिर जोर पकड़ लिया है। ऑटा के पूर्व अध्यक्ष एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत के पूर्व विभागाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि कुलपति और कुलसचिव के मिलीभगत से तकरीबन तीन करोड़ 84 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई है।
पिछले साल फरवरी में छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्र ने भी यह मुद्दा उठाते हुए कुलपति और कुलसचिव पर दान में मिली रकम में घोटाला करने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही प्रो. शास्त्री शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि वह इविवि में दीक्षांत समारोह के विरोधी नहीं हैं लेकिन डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि दिए जाने पर उन्हें आपत्ति है, क्यों कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों के इतिहास में कहीं भी किसी कार्यरत डीजीपी या पुलिस आयुक्त को मानद उपाधियां नहीं दी गई हैं। वह इसका विरोध करते हैं और पांच सितंबर को दीक्षांत समारोह वाले दिन यूजीसी के सामने धरना-प्रदर्शन करेंगे।
प्रो. शास्त्री ने दावा किया कि विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरुण टंडन के किसी भी समिति का सदस्य या अध्यक्ष होने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके लिए उन्होंने कार्य परिषद के निर्णय का स्वागत करते हुए मांग की है कि पूर्व में जो जांच हुई है, उसे भी निरस्त करते हुए किसी नई कमेटी से जांच कराई जाए। प्रो. शास्त्री ने यह आरोप भी लगाया है कि कुलपति के पूर्व ओएसडी अमित सिंह के मामले में डीजीपी के दबाव में पुनर्विवेचना का आदेश देना इविवि प्रशासन एवं डीजीपी की मिलीभगत का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
‘विश्वविद्यालय में जब भी अच्छा कार्य होता है कुछ लोग कहीं से निकलकर विरोध शुरू कर देते हैं। इन लोगों ने ही कॉलेज में परास्नातक और पीएचडी का विरोध किया था। रंजीत टोपा ने जो धनराशि दी थी, वह मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संज्ञान में है। अमेरिकी दूतावास ने भी इसी राशि का उल्लेख किया है। पूरी राशि विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखा प्रतिवेदन में दर्शायी गई है, जो संसद में प्रस्तुत की जा चुकी है। कार्यपरिषद में न्यायमूर्ति अरुण टंडन का लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई। अफवाह फैलाने वाले पहले तथ्य की जांच कर लें। विश्वविद्यालय का पूरा ध्यान सकारात्मक कार्यों पर है।’ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह, पीआरओ, इविवि
छात्रों ने गृह मंत्रालय को भेजा पत्र
- डीजीपी ओपी सिंह को मानद उपाधि दिए जाने के निर्णय के विरोध में छात्रसंघ बहाली के लिए आंदोलन क रही संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से गृह मंत्री को पत्र भेजा गया है। छात्र के निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव समेत तमाम छात्र नेताओं ने गृहमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि अपनी सेवाकाल के दौरान कोई भी उपहार या मानद उपाधि ग्रहण करना ‘सेंट्रल सिविल सर्विसेज, कंडक्ट रूल्स 1964 सेक्शन-13’ के विपरीत है। जिन परिस्थितियों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जिला न्यायालय के निर्देश पर प्रवेश धांधली के मामले की जांच कर रहे हों, वहां पुलिस महानिदेशक का इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में मानद उपाधि ग्रहण करना जांच को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही समिति ने इस बात पर भी आपत्ति जताई है कि उत्तरांखड की राज्यपाल को किसी ऐसे समारोह में विशिष्ट अतिथि बना देना, जिसमें कोई गैर संवैधानिक पद वाला व्यक्ति मुख्य अतिथि हो, राज्यपाल की गरिमा के विपरीत है।