छात्रों और शिक्षकों की मांग पर कुलपति ने जारी किए निर्देश
मध्यकालीन इतिहास के नए पाठ्यक्रम को लेकर था विवाद
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) संघटक महाविद्यालयों में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के स्नातक का संशोधित पाठ्यक्रम अब अगले सत्र 2020-21 से लागू किया जाएगा। पहले इसे मौजूदा सत्र 2019-20 से लागू किए जाने की तैयारी थी, लेकिन छात्र और शिक्षक इसके लिए तैयार नहीं थे। उनकी मांग पर कुलपति ने इसे अगले सत्र से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की ओर से स्नातक के पाठ्यक्रम में व्यापक पैमाने पर संशोधन किया गया है। यह संशोधन दूसरे पेपर ‘भारतीय इतिहास’ में किया गया है। बीए प्रथम एवं द्वितीय वर्ष में मध्यकालीन इतिहास को पांच यूनिटों में बांटकर पढ़ाया जाता था और इनमें से चार यूनिटों में मुगल और तुर्क शासकों के इतिहास को ज्यादा जगह दी गई थी, जबकि भारतीय शासकों के बारे में दी गई जानकारी काफी सीमित थी। अब मुगल एवं तुर्क शासकों के इतिहास को केवल एक यूनिट में सीमित कर दिया गया है।
साथ ही 11वीं से 18वीं शताब्दी के बीच उत्तर एवं दक्षिण भारत के अन्य राज्यों के इतिहास को अधिक विस्तार के साथ पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग संशोधित पाठ्यक्रम को मौजूदा सत्र से लागू करना चाहता था और इसके लिए कुलपति से मंजूरी भी मिल गई थी लेकिन छात्राओं और कॉलेजों के शिक्षकों ने इसका विरोध किया। उन्होंने कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को ज्ञापन देकर इसे अगले सत्र से लागू करने की मांग की थी। कुलपति ने उनकी मांगों को मान लिया है। उनके निर्देश पर इविवि में मध्यकालीन इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी इस बाबत लिखित दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।