मध्यकालीन इतिहास का मामला, शिक्षकों ने कुलपति को दिया ज्ञापन
बदलाव को नए सत्र से लागू करने के लिए छात्रों ने भी जताया विरोध
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास के स्नातक का संशोधित पाठ्यक्रम वर्तमान सत्र 2019-20 से लागू होने जा रहा है। संशोधित पाठ्यक्रम को कुलपति की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन कॉलेजों के शिक्षक एवं छात्र मौजूदा सत्र से संशोधित पाठ्यक्रम लागू करने का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने कुलपति कार्यालय में ज्ञापन देकर मांग कि संशोधित पाठ्यक्रम अगले सत्र से लागू किया जाए।
इविवि के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग की ओर से स्नातक के पाठ्यक्रम में व्यापक पैमाने पर संशोधन किया गया है। मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के बीए प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के पाठ्यक्रम के पहले पेपर ‘विश्व इतिहास’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सभी संशोधन दूसरे पेपर ‘भारतीय इतिहास’ में किए गए हैं। संशोधित पाठ्यक्रम को कुलपति से मंजूरी मिलने के बाद विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी ने 18 सितंबर को एक कार्यशाला का आयोजन किया और इसमें विषय से संबंधित संघटक कॉलेजों के शिक्षकों को बुलाया गया।
इस दौरान शिक्षकों को पाठ्यक्रम में हुए बदलाव की जानकारी दी गई और बताया गया कि संशोधित पाठ्यक्रम वर्तमान सत्र से लागू किया जा रहा है। कॉलेजों के शिक्षक और छात्र दोनों ही इसके लिए तैयार नहीं हैं। सीएमपी, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, एडीसी समेत अन्य संघटक कॉलेजों के शिक्षकों ने कुलपति को ज्ञापन देकर मांग की है कि इसे अगले सत्र से लागू किया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि सत्र के बीच में यह बदलाव छात्रों के लिए ठीक नहीं रहेगा। वहीं, छात्रों ने भी कुलपति कार्यालय में ज्ञापन देकर कहा है कि जुलाई से नया सत्र हो चुका है। सत्र के बीच में यह परिवर्तन छात्रों के लिए असुविधाजनक होगा। छात्रों ने भी कुलपति से आग्रह किया है कि इसे अगले सत्र से लागू किया जाए।